पानी माफिया भूमिगत पानी पर डाका डाल रहे हैं। हर रोज हजारों लीटर पानी बिना किसी अनुमति के लिए निकाल कर इसका अवैध धंधा कर रहे हैं। इससे सरकार को राजस्व की हानि तो हो ही रही है, भूमिगत पानी का भी अतिदोहन हो रहा है।
बता दें कि यमुनापार का पूरा इलाका पानी के लिए पानी के टैंकरों पर ही निर्भर है। ऐसे में क्षेत्र के तमाम लोगों ने इसका अवैध कारोबार भी शुरू कर दिया है। नाऊ की सराय क्षेत्र में लगे ट्यूबवेलों से दिन में कई बार पानी की सप्लाई करते हैं। इसके लिए क्षेत्र के बड़े ट्यूबवेल लगभग आठ घंटे तक भूमिगत पानी खींचते रहते हैं। एक टैंकर दिन में कम से कम छह बार भरा जाता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में भूमिगत पानी का स्तर ढाई सौ फुट से भी नीचे चला गया है।
विवादों से बचने को बांटे क्षेत्र
अवैध कारोबार में टकराव की स्थिति से बचने के लिए टैंकर संचालकों ने अपने-अपने क्षेत्र बांट लिए हैं। ये एक-दूसरे के क्षेत्रों में नहीं जाते। हालांकि सभी क्षेत्रों में पानी के दामों में एकरूपता है। लगभग 20 लीटर का ड्रम पांच रुपये में भरा जाता है। एक अनुमान के तहत एक टैंकर में लगभग 12 हजार लीटर पानी आता है।
जल संस्थान का पानी नहीं होने देते सप्लाई
ये पानी माफिया क्षेत्र में जल संस्थान के पानी की सप्लाई नहीं होने देते। हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में जल संस्थान की पाइप लाइन होने के बावजूद भी सालों से बंद पड़ी है। मगर, जिन क्षेत्रों में जल संस्थान पानी की सप्लाई देता है, उसे भी ये लोग आए दिन बाधित कर देते हैं।
जिन क्षेत्रों में पानी की सप्लाई बाधित रहती है या फिर पानी पहुंच पाता है, वहां जल संस्थान के टैंकर भेजने की कोशिश की जाती है।
- मंजू रानी गुप्ता, महाप्रबंधक, जल संस्थान