एटा में जलेसर क्षेत्र के गांव कुंजलपुर में लंपी वायरस से संदिग्ध बीमार गाय मिली है। जिस पर पशुपालन विभाग की टीम ने अन्य पशुओं से अलग कर इसे आइसोलेट कराया है। साथ ही इलाज शुरू करा दिया गया है। वहीं आसपास के इलाके में सैनिटाइजेशन कराया गया है। उधर, लंपी स्किन डिसीज को लेकर जिले में तीनों तहसीलों पर एक-एक टीम का गठन कर दिया गया है। हालांकि अभी तक बीमार पशुओं को आइसोलेट करने के लिए विभाग के पास कोई निश्चित स्थान नहीं है। ऐसे में तैयारी है कि कोई बीमार पशु मिलता है तो संबंधित पशुपालक की जमीन पर ही उसे आइसोलेट किया जाएगा।
कई जिलों में वायरस तेजी के साथ फैल रहा है। गाय, भैंस इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह संक्रमण एक पशु से दूसरे में तेजी के साथ फैलता है। जिसके तहत यह काफी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। जलेसर ब्लॉक क्षेत्र के गांव कुंजलपुर में पहला संदिग्ध मामला सामने आया है। यहां का एक पशुपालक कुछ दिन पहले राजस्थान से गाय खरीदकर लाया था। अन्य पशुओं के साथ ही उसे रखा गया। इस बीच अचानक उसकी त्वचा पर कुछ अलग निशान दिखे। साथ ही उसकी तबीयत भी बिगड़ने लगी। इस पर पशुपालक ने पशुपालन विभाग में फोन कर जानकारी दी। टीम ने पहुंचकर देखा तो उन्हें गाय में लंपी वायरस की आशंका लगी। इस आधार पर उसे भवन के एक हिस्से में आइसोलेट कर दिया गया। साथ ही इस पर भवन में दवा का स्प्रे कराकर सैनिटाइज कराया गया।
क्या है बीमारी
लंपी स्किन डिसीज पशुओं को होने वाली एक वायरल बीमारी है। यह मच्छर और मक्खी के जरिये एक से दूसरे पशु में फैलती है। पशु के शरीर पर छोटी-छोटी गठानें बन जाती हैं, जो गांठों में बदल जाती हैं। शरीर पर जख्म नजर आने लगते हैं। पशु खाना कम कर देता है। बीमारी की शुरूआत में दो से तीन दिन के लिए हल्का बुखार रहता है। लिंफ नोड में सूजन, पैरों में सूजन, दुग्ध उत्पादकता में कमी, गर्भपात, बांझपन और जानवर की मौत भी हो सकती है।
ये बोले सीवीओ
सीवीओ डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि कुंजलपुर में एक गाय में लंपी वायरस के लक्षण महसूस किए गए हैं। उसे आइसोलेट कर इलाज कराया जा रहा है। केवल एक केस होने की वजह से सैंपल नहीं भेजा गया है।