आठ साल बाद हुए सर्किल रेट निर्धारण में गड़बड़ियों की भरमार है। कहीं बाजार मूल्य से कम रेट दर्शाएं गए, तो कहीं अधिक। यूपीएसआईडीसी को छोड़कर अन्य औद्योगिक क्षेत्रों का निर्धारण नहीं किया। सड़क व लिंक मार्ग की भूमि के खसरा नंबर दर्ज नहीं हुए। यह शिकायतें आपत्तिकर्ताओं ने बुधवार को डीएम के सामने रखीं।
कलेक्ट्रेट में दोपहर 12 बजे जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने नए सर्किल रेट पर आईं आपत्तियों की सुनवाई की। 50 से अधिक आपत्तिकर्ता शामिल हुए। जिन क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है। उन क्षेत्रों में सर्किल रेट बढ़ाने की मांग की गई है। कहा गया कि नए सर्किल रेट में ऐसे क्षेत्रों में 100 से 500 रुपये तक ही बढ़ाए गए हैं। बाकी क्षेत्रों में 35 से 45 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। वहीं, जिन क्षेत्रों में विकास नहीं हुआ उनमें सर्किल रेट कम करने के सुझाव आए हैं।
सबसे ज्यादा आपत्तियां सिकंदरा स्थित यूपीएसआईडीसी क्षेत्र से आई हैं। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि यूपीएसआईडीसी के अलावा अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को सूची से बाहर रखा गया है। वहां औद्योगिक की जगह व्यावसायिक क्षेत्र के सर्किल रेट लागू होंगे। जबकि शासनादेश में स्पष्ट प्रावधान है कि जहां भी औद्योगिक इकाइयां हैं उनका सर्किल रेट भी औद्योगिक क्षेत्र के अनुसार निर्धारित किया जाए। डीएम ने बताया कि सर्किल रेट की आपत्तियों पर सुनवाई की गई है। आपत्ति और सुझावों के संबंध में विस्तृत चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।