आगरा में 14 महीने पहले की गई नोटबंदी और छह महीने पहले लागू हुए जीएसटी ने जूता कारोबार को जोर का झटका दिया। देश की 65 फीसदी फुटवियर की जरूरत पूरी करने वाले आगरा के जूता उद्योग में नोटबंदी के बाद दो महीने तक तो 50 फीसदी घरेलू इकाइयों में ताले लगे रहे तो निर्यात इकाइयों पर आर्डर पूरे करने के लिए कच्चे माल को खरीदने में मुश्किलें आईं।
40 फीसदी तक सिमटे घरेलू उत्पादन में अब इकाइयां पटरी पर लौट रही हैं। जूते की चाल अब संभलती दिख रही है। आगरा से हर साल साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये का जूता निर्यात होता है। 190 निर्यातक दुनियाभर में जूते की धाक जमा रहे हैं।
वहीं आठ हजार से ज्यादा इकाइयों के जरिये देश के 65 फीसदी कारोबार पर आगरा काबिज है, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी ने इस कारोबार की कमर तोड़कर रख दी। गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले में हाथ से जूते बनाने वाली इकाइयों पर नोटबंदी का ज्यादा असर पड़ा।
नोटबंदी से जैसे तैसे उबरे तो जीएसटी में 500 रुपये तक पांच फीसदी और इससे अधिक के जूतों पर 12 से 18 फीसदी तक टैक्स लगाया तो हींग की मंडी और घरेलू जूता कारोबारियों को मुश्किलें आ गई। वित्त राज्यमंत्री, वित्त मंत्री के वादा करने और अब तक कई जीएसटी काउंसिल बैठकों के बाद भी जूते से टैक्स कम नहीं किया गया।