गोशाला संचालन के नाम पर एनजीओ का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। प्रति गोवंश पर एनजीओ को 50 रुपये का भुगतान होता है। 5 साल का करार और 10 लाख की कमाई है, लेकिन हाल ये है कि गोवंश भूस प्यास से तड़प रहे हैं।
गोबरा गोशाला में भूख प्यास से गोवंश तड़पता रहा। दो गाय की मौत हो गई। लेकिन, लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के बजाय अफसर पर्दा डालते रहे। सीडीओ व डीएम ने कार्रवाई नहीं की। नतीजा शनिवार को परिवहन आयुक्त ने गोशाला संचालन के नाम पर एनजीओ शिवम फाउडेंशन का फर्जीवाड़ा पकड़ा।
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इस गोशाला में 587 गोवंश हैं। प्रति गोवंश 50 रुपये भुगतान एनजीओ को होता है। एनजीओ के पास एक साल का करार था, लेकिन सचिव और प्रधान ने बिना ग्राम पंचायत में प्रस्ताव लाए। एनजीओ से पांच साल का करार कर लिया। हर साल करीब 10 लाख रुपये एनजीओ को भुगतान हो रहा है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि गोवंश यहां भूख-प्यास से मर रहा है। दो साल में यहां 25 से अधिक गोवंश की मृत्यु हो चुकी है। 15 से अधिक गोवंश बीमार है। अगस्त 2023 में यहां भूख-प्यास से 2 गाय ने दम तोड़ा था। तब डीएम के निर्देश पर एडीएम प्रशासन और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने संयुक्त जांच की।
जांच के बाद ग्राम विकास अधिकारी गौरव कुमार को निलंबित किया गया। प्रधान भूरी सिंह के खिलाफ धारा 95-जी का नोटिस भेजा। वित्तीय अधिकार जब्त करने के लिए भेजे गए इस नोटिस पर डीएम व सीडीओ स्तर से कार्रवाई नहीं की गई। सहायक विकास अधिकारी पंचायत महेंद्र सिंह व खंड विकास अधिकारी सुरेंद्र सिंह और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. गजेंद्र सिंह के विरुद्ध प्रतिकृल पृविष्टि नोटिस जारी हुआ। इनके अलावा तत्कालीन नोडल अधिकारी डीपीओ आदीश मिश्रा और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से स्पष्टीकरण मांगे गए। लेकिन, दो साल बाद भी नतीजा शून्य रहा।
कराई जा रही है जांच
मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह ने बताया कि एनजीओ का एक साल का अनुबंध था। उसे बिना बताए कैसे सचिव ने पांच साल किया। जांच कराई जा रही है। पूर्व में भी गोशाला को लेकर शिकायत व कार्रवाई की गई थी। इस बार सख्त कार्रवाई होगी।
लापरवाही नहीं बर्दाश्त
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का कहना है कि गोवंश संरक्षण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। पूर्व में हुई कार्रवाई के संबंध में जवाब-तलब किया जाएगा। सीडीओ स्तर से जांच कराई जाएगी। किसी भी तरह का भ्रष्टाचार अक्षम्य है।