लोकसभा चुनाव के समर में अब भाजपा के लड़ाकों के एलान पर सबकी नजर है। चर्चाओं का बाजार गरम है। फतेहपुर सीकरी सीट पर हर रोज नया नाम आ जाता है लेकिन इस अटकलबाजी पर जल्द विराम लगने जा रहा है।
भाजपा के पदाधिकारियों का कहना है कि 18 मार्च को पहले और दूसरे चरण के उम्मीदवारों का एलान हो सकता है। पार्टी ने अंतिम पैनल तैयार कर लिया है। इसमें दोनों सीट पर चार-चार दावेदारों के नाम शामिल हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में शनिवार को चुनाव संचालन समिति की बैठक हुई थी। संसदीय समिति की बैठक 18 मार्च को होनी है। इस बैठक के बाद प्रथम चरण और दूसरे चरण के मतदान के लिए प्रत्याशियों के नाम का एलान होने की संभावना है। अब देखना है किसकी किस्मत जोर मारेगी।
आगरा से बघेल का भी नाम
आगरा लोकसभा (सुरक्षित) सीट पर टिकट के दावेदारों की बड़ी लिस्ट है। इसमें सांसद रामशंकर कठेरिया के साथ-साथ पूर्व मेयर अंजुला सिंह माहौर, पूर्व मंत्री रामबाबू हरित, पूर्व मेयर इंद्रजीत आर्य, प्रदेश के कबीना मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल, अशोक कोटिया, ओमप्रकाश चलनीवाले आदि का नाम है। नेतृत्व ने छंटनी करके अंतिम चार में रामशंकर कठेरिया, अंजुला माहौर, एसपी सिंह बघेल और रामबाबू हरित को रखा है।
सीकरी में राजकुमार फिर से दावेदार
इसी प्रकार फतेहपुर सीकरी पर सांसद चौधरी बाबूलाल के साथ मेयर नवीन जैन, राजकुमार चाहर, पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह, विधायक उदयभान सिंह, बबिता चौहान, श्याम भदौरिया, प्रशांत पौनिया, विधायक योगेंद्र उपाध्याय, शैलराज सिंह आदि की दावेदारी है। अब अंतिम चार में चौधरी बाबूलाल, राजकुमार चाहर, नवीन जैन और बबिता चौहान ही मैदान में हैं। राजकुमार पहले भी कई बार टिकट दावेदारों में शामिल रहे हैं।
मथुरा छोड़ सीकरी आने को तैयार नहीं हेमा
फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर स्थानीय दावेदारों के साथ-साथ मथुरा से सांसद फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी के नाम की चर्चा होने लगी थी। ऐसे संकेत मिल रहे थे कि मथुरा लोकसभा सीट पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा चुनाव लड़ेंगे और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी को सीकरी से लड़ाया जाएगा।
इससे बाबूलाल के खेमे में खलबली मच गई थी। लेकिन अब सूत्र हेमा मालिनी के फतेहपुर सीकरी सीट पर आने की संभावनाओं को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि हेमा मालिनी ने स्पष्ट इनकार कर दिया है। हेमा मालिनी ने नेतृत्व से का कहा है कि सांसद बनना उनका मकसद नहीं है। वे तो बांके बिहारी शरण में रहना चाहती हैं। इसलिए यहां अपना निवास बनाया है।