आजादी के बाद से अब तक 16 बार हुए लोकसभा चुनाव में आगरा को महिला सांसद नहीं मिल पाई है। लोकसभा सीट पर महिला वोटरों की संख्या बेशक बराबर ही रहती हो, लेकिन संसद में आगरा सीट का प्रतिनिधित्व करने का गौरव किसी महिला को नहीं मिला है।
अब तक केवल 9 महिला प्रत्याशी ही चुनावी मैदान में उतर पाई हैं, जबकि 311 पुरुष प्रत्याशी ताल ठोंक चुके हैं। भारतीय जनसंघ को छोड़कर किसी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय दल ने आगरा में महिला उम्मीदवार को चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं दिया है।
आगरा लोकसभा सीट पर पहले तीन चुनाव में कोई महिला प्रत्याशी नहीं उतरी। पहली बार 1967 में भारतीय जनसंघ ने एच. रानी को उतारा। उन्होंने कांग्रेस से तीन बार के सांसद रहे सेठ अचल सिंह को कड़ी टक्कर दी, लेकिन वो हार गईं।
एच. रानी दूसरे स्थान पर रहीं और उन्हें तब 68,095 वोट मिले थे। उन्हें कुल 23.99 प्रतिशत वोट मिले थे। इसी चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पी. कुमारी चुनाव लड़ी। उन्हें 2042 वोट हासिल हुए थे। इसके बाद 1984 तक आगरा के चुनावी अखाड़े में कोई महिला नहीं आई।
इन चुनाव में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं
1951, 1957, 1962, 1971, 1977, 1980, 1989, 1991, 1999, 2004 के आम लोकसभा चुनाव में एक भी महिला प्रत्याशी आगरा लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में नहीं उतरी। राजनैतिक दलों को तो छोड़िए, निर्दलीय प्रत्याशी भी इन चुनाव में नहीं उतरीं, जबकि रिकॉर्ड तोड़ 51 और 43 पुरुष प्रत्याशी तक चुनाव लड़ चुके हैं।
राष्ट्रीय-क्षेत्रीय दलों ने नहीं बनाया उम्मीदवार
1984 में निर्दलीय सुमन ने चुनाव लड़ा, पर केवल 600 वोट पा सकीं। वो 17 वें नंबर पर रहीं थीं। इसके बाद 1996 में तीन महिला प्रत्याशी आईं, लेकिन किसी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय दल ने महिलाओं को टिकट नहीं दिया। भारतीय क्रांति दल ने असफिया बेगम को उतारा, जिन्हें 326 वोट मिले।
इसी चुनाव में निर्दलीय रेनू को 124 और चित्रा सचान को 79 वोट मिले। 1989 में निर्दलीय शम्मी 1310 वोट पा सकीं। 2009 में एकमात्र महिला प्रत्याशी रामदेवी को 532 वोट और 2014 में भी इकलौती महिला प्रत्याशी अनीता को 765 वोट मिले थे।
फतेहपुर सीकरी सीट पर महिलाओं का जलवा
2009 में परिसीमन के बाद पहली बार अस्तित्व में आई फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर पहली सांसद महिला ही बनीं। बसपा की सीमा उपाध्याय को इस लोकसभा का प्रतिनिधित्व क रने का मौका मिला। उन्होंने सिने स्टार और आगरा से दो बार के सांसद राज बब्बर को हराया था।
वर्ष 2014 के चुनाव में भी प्रमुख दलों बसपा ने सीमा उपाध्याय और समाजवादी पार्टी ने रानी पक्षालिका सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि दोनों हार गईं, लेकिन इन दोनों को मोदी लहर में भी अच्छे वोट मिले। सीमा उपाध्याय को 2,53,483 और पक्षालिका सिंह को 2,13,397 वोट मिले थे।