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लोक अदालत ने पूछा, जब जलापूर्ति ही नहीं हुई तो उपभोक्ता को क्यों दिया बिल

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कासगंज। बिना जल आपूर्ति दिए ही उपभोक्ता को बिल देने का मामला स्थायी लोक अदालत में पहुंचा तो पालिका सोरों पालिका में खलबली मच गई। अदालत ने नोटिस जारी कर जबाब मांगा और जिम्मेदारों को तलब किया। 15 दिन पहले दायर हुए इस वाद का बुधवार को निस्तारण हो गया और पीड़ित की समस्या का समाधान हुआ है।
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सोरोंजी के मोहल्ला योगमार्ग निवासी योगेशचंद्र ने एक वाद पांच अक्तूबर को स्थायी लोक अदालत में दायर किया। अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि जुलाई 2017 से सितंबर 2020 तक पालिका की ओर से जल आपूर्ति नहीं दी गई। 2 सितंबर 2020 से आपूर्ति मिली। लेकिन 3000 रुपये का जलकर पालिका ने लगा दिया और नोटिस भेज दिया। इसकी शिकायत तहसील दिवस में भी हुई, लेकिन वहां के निस्तारण से उपभोक्ता संतुष्ट नहीं हुआ। स्थायी लोक अदालत में जब प्रार्थना पत्र पहुंचा तो अदालत के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, सदस्य बसंत शर्मा एवं डा. सपना अग्रवाल ने सोरों पालिका को नोटिस जारी किया।
इस पर 12 अक्तूबर को पालिका के कर अधिकारी अजहर हुसैन ने अदालत में अपना पक्ष रखा कि सात दिन में बिल संशोधित करा दिया जाएगा। बुधवार को इस मामले में सुनवाई थी तो पीड़ित को न्याय मिल गया। पालिका ने बिल संशोधित किया और वर्ष 2022 तक का बिल भुगतान पीड़ित ने कर दिया। 3000 के सापेक्ष मात्र 1200 रुपये का कर जमा करना पड़ा। न्यायालय के सख्त रुख के बाद पीड़ित को न्याय मिला।
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पीड़ित उपभोक्ता में निशुल्क प्रार्थना पत्र स्थायी लोक अदालत में प्रस्तुत किया। 5 अक्तूबर को मिल प्रार्थना पत्र पर अदालत ने नोटिस जारी किया। मात्र 15 दिन में पीड़ित को न्याय दिलाया गया है। लोक अदालत प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का समाधान कराती है। - चंद्रशेखर प्रसाद, अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत
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