मैनपुरी। साक्षर भारत मिशन योजना बंद होने के साथ ही जिले में साक्षरता दर बढ़ाने के सपने पर भी ताला लग गया। लोक शिक्षा केंद्र बंद होने के बाद कोई पहल ही नहीं की गई। शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में अब भी हजारों बुजुुर्ग निरक्षर हैं। विभाग ने अब नव साक्षर योजना शुरू की है। इसमें समाज सेवियों को जिम्मेदारी साैंपी गई है। लेकिन समाज सेवी इस कार्य में सहयोग के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। साक्षरता दर बढ़ाने के लिए सरकार ने वर्ष 2010 में साक्षर भारत मिशन योजना की शुरुआत की थी। जिले में यह योजना जुलाई 2013 में शुरू हो सकी। पांच साल तक चली साक्षरता योजना 31 मार्च 2018 को बंद कर दी गई। बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में हजारों लोग आज भी निरक्षर ही हैं।
इन्हें साक्षरता अभियान के सर्वे के दौरान चिह्नित किया गया था। अब इन निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए विभाग ने नव साक्षर योजना तो शुरू की है लेकिन इसके लिए कोई विभागीय व्यक्ति नियुक्ति नहीं किया गया है। समाज सेवकों पर निरक्षरों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी है।