आगरा के भैरों बाजार स्थित केनरा बैंक की बेलनगंज शाखा का भवन ढहने से अब तक दस्तावेज को निकाला नहीं जा सका है। मलबे में दबे कुछ सामान को तो बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों ने निकालकर अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन लॉकर मलबे के नीचे ही दबे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि लॉकर निर्माण करने वाली कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर एक दो दिन में उन्हें निकालकर कचहरी घाट शाखा में शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि तब तक खुले आसमान के नीचे मौजूद लॉकरों पर पड़ने वाली धूप और पानी से अंदर रखे सामान पर पड़ने वाले असर को लेकर लोग चिंतित हैं।
शुक्रवार को कचहरी घाट शाखा पहुंचे कई खाताधारकों ने मांग की थी कि बैंक जल्द से जल्द लॉकर सही जगह शिफ्ट करें ताकि वह अपने लॉकर में रखे सामान को चेक कर सकें। हालांकि सूत्रों का कहना है कि बैंक को अभी तक मलबे में लॉकर की चाबियां नहीं मिल सकी है। यही वजह है कि लॉकर निर्माता कंपनी के साथ मिलकर विकल्प पर मंथन किया जा रहा है।
केनरा बैंक के लीड बैंक मैनेजर ऋषिकेश बनर्जी ने बताया कि लॉकरों को जल्द ही कचहरी घाट शाखा में शिफ्ट कर दिया जाएगा, जिसके बाद लोग लॉकरों का फिर से इस्तेमाल कर सकेंगे।
पहले क्यों ध्वस्त नहीं हुई बिल्डिंग, सवाल पर एडीए मौन
आगरा के छत्ता वार्ड के भैरों बाजार क्षेत्र में कृष्णा मेट्रो मॉल के निर्माण स्थल पर पुरानी बिल्डिंग धराशायी होने के मामले में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने रिपोर्ट पेश कर चुप्पी साध ली है। अफसर सिर्फ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि शिकायतों के चलते निर्माण की लगातार जांच की जा रही थी। प्राधिकरण की ओर से पास किए गए नक्शे के अनुरूप ही निर्माण हो रहा था। जो बिल्डिंग गिरी, वह भी निर्माण का हिस्सा थी और उसे सेट-बैक एरिया के तौर पर खाली छोड़ा जाना था।
हालांकि इस बात पर कोई भी अफसर बोलने को तैयार नहीं है कि जब निर्माण शुरू हुआ तो उस हिस्से को क्यों नहीं तोड़ा गया। चूंकि हादसे के समय बैंक के कर्मचारी-अधिकारी लंच पर गए थे, ऐसे में जानमाल को बड़ा नुकसान होने से बच गया लेकिन निर्माण शुरू होने के बावजूद बिल्डिंग का न गिराया जाना सवाल खड़े कर रहा है।
बता दें, उच्चाधिकारियों को भेजी गई एडीए की आख्या के अनुसार निर्माण कार्य पूरी तरह स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप पाया गया है। एडीए की रिपोर्ट स्वीकार करती है कि भूखंड संख्या- 8/390 और 8/390/1 पर 4488.99 वर्गमीटर क्षेत्र में मानचित्र संख्या एडीए/बीपी/24-25/0232 स्वीकृत है। नियमानुसार, निर्माणकर्ता किरधा अर्थ डेवलपर्स और कृष्णा भू विकास को सेट-बैंक एरिया खाली करने के लिए पुरानी बिल्डिंग को पहले ही पूरी तरह ध्वस्त करना था।
सहायक अभियंता प्रमोद कुमार की ओर से एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मौली को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माणकर्ता को वह पुरानी बिल्डिंग स्वयं ध्वस्त करनी थी। सवाल यह है कि जब बिल्डिंग खतरनाक थी तो उसे पहले क्यों नहीं गिरवाया गया?