वृंदावन (मथुरा)। आखिरकार लॉकडाउन में आजम अली जिंदगी की जंग हार गया। 20 अप्रैल को दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल में बालक ने दम तोड़ दिया। पिछले 13 महीनों ने किडनी खराब होने के कारण आजम की एक हफ्ते में डायलिसिस होती थी। मथुरा प्रशासन की मदद से जरूर इस 30 दिन के लॉकडाउन में एक बार ही वह डायलिसिस करा सका। पिता का आरोप है कि दिल्ली हॉस्पिटल प्रशासन ने उनका साथ नहीं दिया। मथुरा के कई हॉस्पिटल ने यही व्यवहार किया।
शहर के भरतपुरगेट पर सैयद वाली गली निवासी मुईन का 10 साल का बेटा आजम अली पिछले 13 महीने से किडनी की बीमारी से पीड़ित था। दिल्ली के चाचा नेहरू हॉस्पिटल में बेटे की हफ्ते में एक बार डायलिसिस कराने जाना पड़ता था। आर्थिक रूप से कमजोर मुईन बेटे को बचाने के लिए जुटा रहा। आखिरकार कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन हो गया तो आवागमन में दिक्कत हुई। अमर उजाला ने प्रमुखता से 30 मार्च के अंक में पीड़ित मुईन की खबर प्रकाशित की। आखिरकार लॉकडाउन में मुईन को दिल्ली जाने की अनुमति मिल गई।
एक अप्रैल को दिल्ली पहुंचकर बेटे की डायलिसिस कराई। हालांकि इसके लिए उसे प्राइवेट वाहन पर उधार लेकर व्यय करना पड़ा। 20 अप्रैल को फिर डायलिसिस के लिए गया, पर हॉस्पिटल की इमरजेंसी में पहुंचते ही आजम ने दम तोड़ दिया। पिता का आरोप है कि दिल्ली हॉस्पिटल प्रशासन ने सहयोग नहीं किया। डायलिसिस के लिए बार-बार मना करते रहे। बेटे की हालत बिगड़ गई मथुरा में भी जिला अस्पताल समेत कई अस्पतालों ने इलाज नहीं किया। बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।