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मथुरा: लॉकडाउन में भी नहीं सुधरी यमुना की दशा, नालों की गंदगी से मैला हो रहा पानी

Wed, 22 Apr 2020 12:53 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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यमुना नदी में गंदगी - फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन में वातावरण साफ-सथुरा हो रहा है, लेकिन यमुना नदी का पानी स्वच्छ नहीं हुआ। मथुरा शहर से निकल रहे नालों की गंदगी से यमुना मैली हो रही है। इस गंदगी को रोक पाने में नगर निगम नाकाम साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों ने घाटों पर जाल लगाकर कूड़े को यमुना में जाने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन नमामि गंगे के कर्मचारियों द्वारा कूड़ा न हटाने के कारण स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। 
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लॉकडाउन के दौरान फैक्टरियां बंद हैं। दिल्ली, हरियाणा और मथुरा की फैक्टरियों से यमुना में आने वाला केमिकलयुक्त पानी भी अब बंद है। इस कारण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार यमुना का जल शुद्ध हुआ है, लेकिन मथुरा के नालों की गंदगी यमुना में जा रही है। 

शासन स्तर पर इस मुद्दे के गूंजने के बाद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब इन प्लांटों को बड़ा रूप दिया जा रहा है, जिससे नालों में आ रहे पानी की क्षमता के अनुसार ट्रीटमेंट किया जा सके। इस कार्य में भी काफी समय लगेगा। 
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सामान्य दिनों में घाटों पर आते हैं श्रद्धालु

शहर के विश्राम घाट, स्वामी घाट बंगाली घाट, श्याम घाट, रामघाट समेत आधा दर्जन घाटों पर सामान्य दिनों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं। इसलिए उनकी मांग है कि इन घाटों पर गंदगी न पहुंचने के इंतजाम किए जाएं। 

लॉकडाउन से पहले श्रद्धालुओं ने कुछ घाटों पर जाल लगाकर नालों का कूड़ा रोकने की कोशिश की, लेकिन जालों पर इकट्ठा हुआ कूड़ा न उठ पाने और पानी बढ़ जाने के कारण कूड़ा फिर यमुना में पहुंच गया। मंगलवार को भी विश्राम घाट पर विश्व धर्म रक्षक दल के कार्यकर्ताओं ने 50 फीट का एक और जाल लगाया है। 

विश्व सनातन धर्म रक्षक दल के संस्थापक विपिन स्वामी ने बताया कि यमुना के किनारों से सिल्ट निकाली जानी चाहिए, जिससे लोग सीढ़ियों पर उतरकर स्नान कर सकें। घाट बनाने का उद्देश्य पूरा होना चाहिए। 

प्रदूषण नियंत्रण विभाग को यमुना के किनारों के सैंपल भेजने चाहिए, जिससे जल की सही शुद्धता का पता चले। यमुना के किनारों की सीवर लाइन दुरुस्त की जाए। श्याम घाट पर सीवर का पानी यमुना में जाने से रोका जाना चाहिए। 
 

विश्राम घाट पर 50 फीट लंबा जाल लगाया

विश्व धर्म रक्षक दल के अध्यक्ष विजय चतुर्वेदी ने बताया कि यमुना की सफाई के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं पर लंबे समय से काम चल रहा है। शहर के नालों का पानी यमुना में गिरने से रोक पाने में प्रशासनिक मशीनरी फेल ही साबित हुई है। 

श्रद्धालु ही अपने स्तर से काम कर रहे हैं। मंगलवार को विश्राम घाट पर 50 फीट लंबा जाल लगाया है। इससे नालों की गंदगी घाटों पर नहीं जाएगी। नमामि गंगे के कर्मचारी सक्रियता से जाल से कूड़ा उठा लें तो बेहतर होगा। 

ब्रज भक्त मंडल के अध्यक्ष मुकेश चतुर्वेदी ने बताया कि यमुना को माता का दर्जा दिया गया है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण यमुना का पानी गंदा हो रहा है। इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं। 

नदियों के लिए अलग से मंत्रालय बना दिया गया। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक नदियों की सफाई के लिए कई बार बयान दे चुके हैं। मथुरा में यमुना की सफाई के लिए लंबे समय से मांग उठ रही है, लेकिन इसका असर दिखाई नहीं दे रहा।
 
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37 नालों में 15 नाले हुए टेप, 22 नाले गिर रहे यमुना में 

यमुना को शुद्ध करने के लिए केन्द्र तथा प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही नमामि गंगे योजना के अंतर्गत 460 करोड़ की योजना पर अभी तक पूरी तरह से काम नहीं हो पाया है। कुल 37 नालों में से वृंदावन के 11 तथा मथुरा के चार नालों को टेप कर दिया गया है। 

इस प्रकार से 15 नालों को यमुना में गिरने से रोक दिया गया है। जबकि मथुरा में 21 तथा वृंदावन में दो नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं। जल निगम के परियोजना अभियंता आरपी यादव ने बताया कि अभी इस योजना का काम रुका हुआ है। काम प्रारंभ करने के लिए जिलाधिकारी से अनुमति मांगी गई है।
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