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Lockdown: आगरा की महिलाएं बोलीं- कोरोना के खात्मे के लिए जरूरी है घरों में रहना

Tue, 14 Apr 2020 04:22 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आगरा लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला
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जान है, तो जहान है। यह कहना है आगरा की उन तमाम महिलाओं का जो अपने परिवार के साथ इन दिनों लॉकडाउन में जिंदगी जी रही हैं। महिलाओं का मानना है कि कोरोना वायरस रूपी राक्षस का वध करने के लिए लॉकडाउन और सामाजिक दूरी ही हथियार हैं। आमजन को इसका सही से इस्तेमाल करना होगा।  
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जिस तरह से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, उसमें लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) सबसे अधिक कारगर है। महिलाओं का कहना है कि जरूरी सामान की आपूर्ति अगर सुचारू रूप से चलती रहे, इस लड़ाई को जीतने में कोई दिक्कत नहीं होगी। उनका कहना है कि जिंदगी के लिए लॉकडाउन-टू जरूरी है। 

कमला नगर की सोनम सचदेवा ने कहा कि केंद्र सरकार को अगर लगता है कि लोगों के हित में लॉकडाउन जरूरी है, तो इसकी समय सीमा का विस्तार करना सही है। इस समय यह बेहद जरूरी है। रश्मि नगर की नैना अग्रवाल ने कहा कि दूध, सब्जी और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति होती रहे, तो कोरोना से लॉकडाउन में रहते हुए कुछ और दिनों तक लड़ने की जरूरत है।
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'सरकार ने सही फैसला लिया'

वैभव एन्क्लेव की दीपा जुरैल ने कहा कि सरकार ने लॉकडाउन की अवधि बढ़ाकर सही फैसला लिया है। जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं उसे रोकने के लिए लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ाना जरूरी था। कन्हैया पार्क की सुनीता छाबड़िया ने कहा कि लॉकडाउन से काफी हद तक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता है। हमारी जरा सी लापरवाही नासूर बन सकती है। 

उत्तर प्रदेश में आगरा कोरोना वायरण के संक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां अब तक 142 मामले मिल चुके हैं। दो दिन में 51 नए मरीज मिले हैं। तीन संक्रमितों महिलाओं की मौत भी हो चुकी है। 10 लोग ठीक हो गए हैं। अप्रैल में मरीजों के संपर्क से तेजी से संक्रमण बढ़ा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर के निजी अस्पताल में भर्ती रही एक महिला से 28 लोग संक्रमित हो गए। 
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