फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हजारों किलोमीटर पैदल चलकर जा रहे घर, नहीं किए जा रहे क्वारांटाइन

विज्ञापन
बस स्टैंड पर मजदूर की जांच करता स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी - फोटो : FIROZABAD
विज्ञापन
टूंडला (फिरोजाबाद)। हजारों किलोमीटर पैदल चलकर लोगों का अपने घर जाना बदस्तूर जारी है। एक प्रांत से दूसरे प्रांत और कई जिलों से होकर गुजरने वाले श्रमिकों के दर्द को सुनने वाला कोई नहीं हैं। उन्हें कहीं भी प्रशासन द्वारा रोककर न तो क्वरंटीन किया जा रहा और न ही उनके पहुंचे की व्यवस्था की जा रही। बृहस्पतिवार को गुजरात से 15 दिन पूर्व चले ऐसे ही 12 से अधिक श्रमिकों ने टूंडला पहुंचकर अपनी दर्द भरी दास्तां सुनाई तथा फिर से अपनी मंजिल के लिए निकल पड़े।
विज्ञापन

लॉकडाउन के बाद कुछ दिन तक तो मजदूर जहां के तहां रुके हुए थे, परंतु जैसे-जैसे उनके रुपये व रसद समाप्त हुआ उनके सामने समस्या आने लगी। ऐसे में उनकी सहायता मालिकों ने भी नहीं की। तब उन्होंने अपने-अपने घरों की तरफ पलायन करना शुरू कर दिया। पैदल चलने के चलते किसी-किसी के तो पैर सूज कर मोटे हो गए हैं तो किसी के पैर में छाले तक पड़ गए हैं।
गुरुग्राम, गाजियाबाद, नोयडा, दिल्ली, पंजाब, जयपुर, भोपाल आदि से विभिन्न फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर लगातार आ रहे हैं, किंतु बृहस्पतिवार को टूंडला पहुंचे 12 से अधिक ऐसे मजदूर थे जो गुजरात के सूरत से चले थे। गुजरात से लखनऊ जा रहे शिवशंकर, श्याम, सुरेश, मिनकू, रामेश्वर आदि ने बताया कि वे सूरत से करीब 15 दिन पूर्व चले थे। खाने पीने को कोई केले, कोई भोजन का पैकेट दे जाता है तो पेट भर जाता है, किंतु उनके घर तक पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं कर रहा। ऐसे में वह पैदल ही चलते आ रहे हैं। इस दौरान रास्ते में उनकी कहीं कोई चेकिंग भी नहीं की जा रही। तहसीलदार डॉ. गजेंद्रपाल सिंह ने बताया कि पीछे से ही इन मजदूरों को रोका जाना चाहिए, किंतु ऐसा नहीं हो रहा है। बिना जांच के आ रहे मजदूर परेशानियां बढ़ा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें