मैनपुरी। लॉकडाउन में ग्राम पंचायतों की जांच पर ‘लॉक’ लग गया है। विकास कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़े की शिकायतें आए-दिन सामने आते रहते हैं। गांव के लोगों द्वारा ही जिलाधिकारी या मुख्य विकास अधिकारी से मामले की शिकायत की जाती है। ऐसी ही शिकायतों पर लगभग आधा सैकड़ा ग्राम पंचायतों की जांच के आदेश अधिकारियों को दिए गए थे। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी ने तीन सदस्यीय समितियों का गठन भी किया था। मार्च में लॉकडाउन हो जाने के चलते इनकी जांच रुक गई। बीते तीन माह में एक भी जांच पूरी नहीं हो सकी। इससे कोई कार्रवाई भी नहीं की जा सकी। इससे एक ओर जहां शिकायतकर्ता परेशान हैं तो वहीं दूसरी और ग्राम प्रधान और सचिव खुश हैं। वे चाहते हैं कि जांच में देरी से उन्हें काम कराने का मौका मिल जाएगा।
केस एक
विकास खंड करहल की ग्राम पंचायत टिमरख में शौचालय में फर्जीवाड़े की शिकायत मुख्य विकास अधिकारी से की गई थी। मामले में सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी को जांच सौंपी थी। पांच महीने बाद भी अब तक जांच शुरू भी नहीं हो सकी है।
केस दो
विकास खंड घिरोर की ग्राम पंचायत भटानी में शौचालय में फर्जीवाड़े की शिकायत छह माह पहले मुख्य विकास अधिकारी से की गई थी। इसमें तीन सदस्यीय समिति जांच के लिए गठित की गई थी। अब तक समिति ने जांच शुरू नहीं की है।
लॉकडाउन के चलते अधिकारी गांवों में जांच करने के लिए नहीं जा सके। सभी जांच अधिकारियों को पत्र जारी कर जल्द से जल्द ग्राम पंचायतों की जांच पूरी कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए पत्र जारी किया गया है।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।