16एमएनपी-13-दिल्ली से पैदल आया सोनू का परिवार
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मैनपुरी। चिलचिलाती धूप में जहां एक कदम भी चलना मुश्किल था, उसी धूप में एक मजदूर परिवार अपने बच्चों का हाथ थामे घर की ओर बस इसी उम्मीद में चला रहा था कि मंजिल तक पहुंचने में कहीं देर न हो जाए। अब तक वह करीब तीन सौ किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल ही तय कर चुका था और 20 किलोमीटर का सफर बाकी थी। पसीने से तरबतर ये परिवार शनिवार को दोपहर एक बजे शहर के ईशन नदी पुल से गुजरा।
ये परिवार था नगला कोंडर निवासी सोनू का। सोनू अपने पत्नी और दो बच्चों के साथ दिल्ली में रहता था। वहां वह हौजरी कंपनी में सिलाई करता था। सोने से पूछा कि इतने दिन कैसे काटे तो बोला, जैसे भी काटे बहुत भारी रहे। इतना कहते-कहते उसे चेहरे पर परेशानी के भाव साफ जाहिर होने लगे थे। पिता को मायूस देख दोनों बच्चे भी उसकी ओर उदासी भरी नजरों से ताकने लगे। इस पर सोनू ने चेहरे को सुधारते हुए बच्चों से कहा कि अब तो आ गया अपना घर, बस 20 किलोमीटर ही तो है। पिता ने जब ऐसा कहा तो दोनों बच्चों के चेहरों पर मुस्कान आ गई।
सोनू ने बताया कि वह दो दिन पहले दिल्ली से चला था, बीच में एक ट्रक से भी 50 किलोमीटर का सफर किया। अभी भी वह केवल जरूरी सामान के दो बैग लेकर आए थे, बाकी का सामान किराये के कमरे पर ही है। सफर के दौरान कुछ लोगों ने खाना भी खिलाया। जब सोनू से ये पूछा कि हालात सामान्य होने के बाद वापस जाओगे तो एक पल भी सोचे बिना यही जवाब मिला अब जो करेंगे यहीं करेंगे बाहर नहीं जाएंगे।
वहीं दोपहर दो बजे भोगांव क्षेत्र में जीटी रोड से हरदोई जा रहे रामसनेही की कहानी ही कुछ ऐसी ही थी। एक हाथ में बैग तो कंधे पर बेटे को बैठाए थे। बेटा छोटा होने के कारण गर्मी में चल नहीं सकता था। वह गुरुग्राम से लौट रहा था। चार दिन पहले वह घर के लिए निकला था। अभी तो करीब दो सौ किलोमीटर का सफर तय करना भी बाकी थी। रामसनेही से जब लॉकडाउन के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में पूछा तो बस वे इतना ही बोले कि अब उन मुसीबतों को याद नहीं करना।
रोजाना गुजर रहे सैकड़ों परिवार
रोजाना ऐसे सैकड़ों परिवार जिले की सड़कों से गुजर रहे हैं। इन्हें बस अपने घर पहुंचने की जल्दी है। शहरों में उन्होंने जो भी कमाया, लॉकडाउन में अब कुछ नहीं बचा। अधिकांश लोगों का एक ही जवाब है कि खेती करेंगे या मजदूरी पर रहेंगे घर में।