विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि प्रकरण में अत्यंत गंभीर और संवेदनशील तथ्य यह है कि अभियुक्त अमित वादी का रिश्तेदार था। पीड़िता अभियुक्त की पुत्री के रूप में थी। वह विश्वास के कारण ही अभियुक्त अमित के साथ गई होगी। परंतु अभियुक्त ने संबंधों की मर्यादा को लांघते हुए पीड़िता के विश्वास को तार-तार किया। नन्ही अबोध बालिका के विरुद्ध सह अभियुक्त के साथ हवस पूर्ति करते हुए जघन्य घटना को अंजाम दिया। इस नन्ही जान को उसके माता-पिता ने कभी कोई सुई भी न चुभने दी होगी, उसने स्वयं का जीवन बचाने के लिए कितना संघर्ष किया होगा। अदालत ने पंक्तियां भी लिखीं।
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यह पंक्तियां
एक बलात्कारी दिन आया, आके बीत गया।
रोया खबरें सुन-सुन कर, मन मानों रीत गया।
बच्चियों तक को नहीं बख्शा इन असुरों ने।
खुदा शायद हार गया, शैतान जीत गया।
छीन ली कुछ मासूमों की मुस्कान सदा के लिए।
ख़िलखिलाहटें थमीं और जीवन संगीत गया।
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