मैनपुरी। शहर के 663 मकानों में बिजली चोरी की जा रही है। इन मकानों में बिजली का उपयोग किए जाने के बाद लगातार बिल कम आ रहे हैं। जबकि उनका लोड कम नहीं हुआ है।
शहरी क्षेत्र के अधिकांश घरों में बिजली कनेक्शन हैं, जिनके यहां स्वीकृत लोड के सापेक्ष अधिक बिजली का प्रयोग किए जाने की विभाग को आशंका है। विभाग ने शहरी क्षेत्र के ऐसे मकान चिन्हित किए हैं जहां लंबे समय से कम बिजली का बिल आ रहा है। जबकि पूर्व में इन मकानों का दोगुना तक बिल आया है। अचानक कम बिजली बिल आने से विभाग को ऐसे मकानों में बिजली चोरी की आशंका हुई तो मकान चिन्हित किए गए। विभागीय सूत्रों के अनुसार इन मकानों में स्वीकृत लोड कम नहीं कराया गया है। जितना लोड कनेक्शन लेते समय स्वीकृत कराया गया था उतने लोड का ही प्रयोग लंबे समय से किया जा रहा है। ऐसी हालत में कम बिल आने से विभाग की नजर चिन्हित किए गए 663 मकानों पर टिकी हुई है।
शहरी क्षेत्र के 663 मकानों में बिजली चोरी किए जाने की विभाग को आशंका है। बिजली चोरी करने वाले मकानों के खिलाफ चोरी पकड़ने के लिए 15 जनवरी के बाद विशेष अभियान चलाने की विभाग ने तैयारी की है। चोरी पकड़ने के लिए विशेष टीमें गठित की जाएंगी।
बिजली की आपूर्ति और खपत के बीच के अंतर को विभागीय भाषा में लाइनलॉस कहा जाता है। लाइनलॉस को विभाग तकनीकी कमी और बिजली चोरी में शामिल करता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार 10 प्रतिशत तक लाइनलॉस तकनीकी कमी की वजह से होता है।
लाइनलॉस पर एक नजर
वर्ष लाइनलॉस
2019 32 प्रतिशत
2018 37 प्रतिशत
2017 40 प्रतिशत
2016 43 प्रतिशत
2015 45 प्रतिशत
बिजली विभाग का लाइनलॉस कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। दस प्रतिशत तक लाइनलॉस तो तकनीकी कमी की वजह से ही हो जाता है। अभी भी जिले में 20 प्रतिशत बिजली चोरी मानी जा रही है। जिसे वर्ष 2020 में दस प्रतिशत तक करने का विभाग का लक्ष्य है।
रवि कुमार अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता