मैनपुरी। सौ शैया अस्पताल के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बच्चों और महिलाओं को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त सौ शैया अस्पताल से मरीजों को पुरानी जिला अस्पताल में ही रेफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल से मरीजों को मिनी पीजीआई सैफई के लिए रेफर किया जाता है।
वर्ष 2016 में तत्कालीन सपा सरकार ने जिले में सौ शैया अस्पताल का निर्माण 16.10 करोड़ की लागत कराया था। सौ शैया अस्पताल के निर्माण का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को जिले में ही बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराना था। सरकार की यह मंशा सौ शैया में इलाज शुरू होने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। आज भी सौ शैया अस्पताल में सिर्फ जन्म लेने वाले बच्चों को ही भर्ती किया जा रहा है। बाहर से आने वाले निमोनिया, बुखार और अन्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों को यहां भर्ती नहीं किया जा रहा है। ऐसा ही हाल महिलाओं के साथ भी है। यहां प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को तो भर्ती कराया जा रहा है, लेकिन अन्य बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को जिला अस्पताल के लिए ही रेफर किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में सभी प्रकार के मरीजों का आना जाना रहता है। अस्पताल में बच्चों के लिए आईसीयू व अन्य सुविधाएं नहीं हैं। जबकि सौ शैया अस्पताल में आईसीयू सहित अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं हैं। इसके बाद भी 100 शैया अस्पताल से बाल मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है।
सौ शैया अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. अशिता यादव, डॉ. उमा चौधरी, डॉ. प्रियंका की तैनाती है। इसके बाद भी महिला मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। यहां महिला मरीजों को ओपीडी में तो उपचार दिया जाता है, लेकिन उन्हें भर्ती केवल प्रसव के लिए ही कराया जाता है।
20 से 25 बच्चे और महिलाएं हर रोज भर्ती
सौ शैया मातृ एवं शिशु अस्पताल होने के बाद भी जिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 25 बच्चे व महिलाओं को भर्ती कराया जा रहा है। जबकि करीब 150 बच्चे व इतनी ही महिलाओं को प्राथमिक उपचार भी दिया जा रहा है।
अस्पताल में 18 की जगह मात्र छह डॉक्टरों की तैनाती है। प्रसव के लिए ही बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। इसके बाद भी बच्चों व महिलाओं को भर्ती कराया जाता है। कभी-कभी डॉक्टरों के अवकाश व अन्य ड्यूटी पर होने के कारण मरीजों को जिला अस्पताल भेजना पड़ता है।
डॉ. एके पचौरी, सीएमएस महिला अस्पताल