कासगंज। 15 वर्ष पूर्व हुई ग्रामीण की हत्या के मामले में नामजद हुए पिता-पुत्र को कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोषी पाया। अपर सत्र न्यायाधीश पंचम कृष्ण लीला यादव ने दोषी पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 70 हजार रुपये का जुर्माना अलग-अलग धाराओं में लगाया गया है।
हत्या की यह वारदात सोरोंजी थाना क्षेत्र के जलालपुर गांव में हुई थी। जहां ग्रामीण पन्ना लाल अपने खेत पर शिवाला प्लांट पर सो रहे थे। पन्ना लाल प्लांट पर बने एक कमरे की छत पर थे। जबकि उनका पुत्र मौकम सिंह नीचे सो रहा था। आरोप है कि नामजद किए गए धर्मेंद्र उर्फ मनुआ और प्रेम नरायन व चरन सिंह ने पेड़ के रास्ते से छत पर चढ़कर गोली मारकर पन्ना लाल की हत्या कर दी थी।
इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ पुत्र मौकम सिंह ने वर्ष 2009 में 16 मई को कोतवाली सोरोंजी में मामला दर्ज कराया। मामले की विवेचना पुलिस के द्वारा की गई। विवेचना में चरन सिंह की नामजदगी सही नहीं पाई गई। नामजदगी सही न पाए जाने पर पुलिस ने विवेचना में चरन सिंह को निकाल दिया। पुलिस ने धर्मेंद्र उर्फ मनुआ एवं प्रेमनरायन के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
इस मामले की सुनवाई न्यायालय में चल रही थी। अपर जिला जज कृष्ण लीला यादव ने इस पूरे मामले पर पीडि़त पक्ष व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अंकित अग्रवाल ने न्यायालय में दोषी पिता पुत्र को अधिकतम सजा की पैरवी की। घटना की पृष्ठभूमि और साक्ष्यों को देखते हुए अपर जिला जज ने हत्या की धाराओं में पिता पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई एवं 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं धमकी देने की धारा में 4-4 वर्ष की सजा सुनाई और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आयुध अधिनियम में दोषी धर्मेंद्र उर्फ मनुआ को 2 वर्ष की सजा सुनवाई गई और 10 हजार रुपये का अर्थदंड आरोपित किया गया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।