सजा मिलने के बाद मीडिया पर भड़की गीता राकेश
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कोर्ट ने आगरा के नारी संप्रेक्षण गृह की पूर्व अधीक्षिका गीता राकेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उसे 43 संवासिनियों और आठ बच्चों को अवैधानिक रूप से छोड़ने और वेश्यावृत्ति के धंधे में डालने में दोषी पाया गया है।
स्पेशल जज (पाक्सो एक्ट) अनिल कुमार द्वितीय ने शनिवार को यह फैसला सुनाया है। आजीवन कारावास की सजा सुनते ही गीता राकेश सहम गई। कोर्ट ने उस पर 5.51 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
इलाहाबाद के मीरगंज इलाके से मई 2016 में गुड़िया संस्था ने रेस्क्यू ऑपरेशन करके 67 महिलाओं और 37 बच्चों को मुक्त कराया था। इनको 20 मई 2016 को आगरा के नारी संप्रेक्षण गृह में भेजा गया था। उन्हें एक साल तक रखा जाना था।
बिना आदेश के संवासनियों और बच्चों को छोड़ा
इनमें से 22 महिलाओं को अलग-अलग कोर्ट के आदेश पर उनके परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया था। इसके बाद गीता राकेश ने बिना किसी आदेश के 21, 22 और 23 मई 2017 को 43 संवासनियों और आठ बच्चों को छोड़ दिया।
गीता राकेश ने इसके लिए न तो प्रार्थनापत्र लिए, न पहचान पत्र और न ही बंधनपत्र भरवाए थे। इलाहाबाद एसडीएम सदर को सामाजिक संस्था गुड़िया के सुनील ने शिकायत की थी। इसके बाद जांच की गई।
जांच के बाद महिला कल्याण विभाग के उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी पुनीत कुमार मिश्र ने एक जून 2017 को थाना एत्माद्दौला में मानव तस्करी, पाक्सो एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कराई। गीता राकेश को गिरफ्तार कर लिया गया था। उसे जेल भेजा गया था।
आखिरी सांस तक रहेगी जेल में
मामला नाबालिगों से जुड़ा होने के कारण सुनवाई पाक्सो एक्ट में चल रही थी। गीता राकेश जेल में निरुद्ध है। शनिवार को कोर्ट ने दोषी गीता राकेश का आखिरी सांस तक (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। चर्चित मामले में अग्रिम विवेचना के आदेश कुछ समय पहले ही दिए गए थे।
सजा सुनते गीता राकेश सहम गई। दोषी गीता राकेश फ्रेंड्स कालोनी, इटावा की रहने वाली है। वहीं कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस सुपुर्दगी में दी गईं 43 महिलाओं और आठ बच्चों को खोजने के प्रयास में लगी है।