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स्टडी में बड़ा खुलासा: भारी आवाज और चेहरे पर बाल, ये हार्मोन बिगाड़ रहा लड़कियों की सूरत; ऐसे करें बचाव

Sun, 03 May 2026 11:05 AM IST
Arun Parashar धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

चिकित्सकों के अनुसार  12-18 साल की उम्र की बालिकाओं, किशोरियों में माहवारी संबंधी परेशानी मिल रही है। इनमें से करीब दो फीसदी में फास्टफूड-खराब दिनचर्या की वजह से ये दिक्कत मिल रही है। इन्हीं वजहों से पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की दिक्कत भी बनी। 
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टेस्टोस्टेरोन - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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अनियमित दिनचर्या, फास्टफूड का अधिक सेवन, मोबाइल के घंटों उपयोग और देर रात जागने के कारण बालिकाओं में पुरुष हार्माेंस (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर बढ़ रहा है। इससे आवाज भारी, चेहरे पर बाल और शारीरिक बनावट पुरुषों जैसी हो रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के अध्ययन में तीन फीसदी बालिकाएं इससे प्रभावित मिली हैं। इससे बांझपन का खतरा भी बढ़ जाता है।
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एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि ओपीडी में आने वाली 8-18 साल की 852 बालिकाओं पर बीते आठ महीने में किए गए अध्ययन में 3.1 फीसदी में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ा मिला। महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अधिकतम 59 एनजी/डीएल (नैनोग्राम प्रति डेसीलीटर) होता है, लेकिन पीड़ित बालिकाओं में यह 200 एनजी/डीएल तक मिला।

 
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इससे उनकी आवाज में भारीपन, चेहरे पर बाल (दाढ़ी-मूंछ), कंधे चौड़े होना, मजबूत मांसपेशियां और मोटापा की परेशानी मिली। पूछताछ में पता चला कि वे प्रतिदिन कुछ न कुछ फास्टफूड-डिब्बा बंद सामग्री उपयोग करती हैं। सप्ताह में 3-5 दिन इसी से पेट भरती हैं। साथ ही रोज 4-6 घंटे मोबाइल-लैपटॉप का भी उपयोग करती हैं। सोने-जागने का समय तय नहीं हैं। अधिकांश रात 11 से एक बजे के बीच सोती हैं। लंबे समय तक ऐसी आदतों से टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ गया। डाॅ. तिवारी ने बताया कि बीते 8-10 साल में ऐसे मामले डेढ़ गुना तक बढ़े हैं। इलाज और स्वस्थ जीवनशैली से बीमारी में काफी राहत मिली।

 

माहवारी पर भी पड़ा प्रभाव
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह ने बताया कि ओपीडी में आने वाली 12-18 साल की उम्र की बालिकाओं, किशोरियों में माहवारी संबंधी परेशानी मिल रही है। इनमें से करीब दो फीसदी में फास्टफूड-खराब दिनचर्या की वजह से ये दिक्कत मिल रही है। इन्हीं वजहों से पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की दिक्कत भी बनी। इससे अंडाणु बनना प्रभावित हो रहा है। इससे 10-12 फीसदी में आगे चलकर बांझपन का भी खतरा रहता है।

 

ऐसे करें बचाव
- चिप्स, नमकीन, बर्गर, पेटीज, मोमोज समेत अन्य फास्टफूड से बचें।
- कार्बोहाइड्रेट ड्रिंक से बचें। तला हुआ भोजन रोजाना न करें।
- रोजाना 30-45 मिनट का व्यायाम करें और तेज गति से चलें।
- दाल, हरी सब्जी, फल, सलाद, ड्राईफ्रूट अधिक लें।
- रात में 9-10 बजे सो जाएं और 6 से 8 घंटे की स्वस्थ नींद लें।

 
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ये भी मिली परेशानी
- कामेच्छा में कमी होना।
- चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना।
- थकान और कमजोरी होना।
- मुंहासे अधिक निकलना।
- बाल झड़ना, वजन बढ़ना।

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