बैंकों से कर्ज लेकर उसे चुकाने के मामलों में कमी आ रही है। इसके चलते जिले में बैंकों के 1.69 लाख से अधिक खातों में 2846 करोड़ रुपये नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) हो गए हैं। बैंकों को सबसे बड़ा झटका कृषि और एमएसएमई जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों ने ही दिया है। हालत यह है कि जिले की बैंकिंग व्यवस्था को दिशा देने वाला लीड बैंक ही कर्ज वसूली में सबसे पीछे है।
जून 2026 तिमाही की एनपीए रिपोर्ट के अनुसार, कुल 2846.53 करोड़ रुपये के एनपीए में से अकेले 2364.54 करोड़ रुपये सिर्फ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के हैं। सबसे खराब स्थिति कृषि क्षेत्र की है, जहां 97,032 डिफॉल्टर खातों में 1391.23 करोड़ रुपये फंसे हैं। यह जिले के कुल एनपीए का लगभग आधा (48.8%) है। वहीं, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर में 30,519 डिफॉल्टर खातों का एनपीए 879.94 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
निजी से पांच गुना अधिक है सरकारी बैंकों का बकाया
एनपीए का सबसे ज्यादा बोझ सरकारी बैंकों के कंधों पर है। जहां निजी बैंकों का कुल एनपीए केवल 467.87 करोड़ रुपये है, वहीं सरकारी बैंकों का एनपीए 2119.69 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि क्षेत्र के अग्रणी केनरा बैंक के 32,574 खातों में 762.52 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक 451.17 करोड़ और भारतीय स्टेट बैंक 237.69 करोड़ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। वहीं को-ऑपरेटिव बैंकों के 258.97 करोड़ रुपये इन कर्जों में फंसे हुए हैं।
जिले का एनपीए कार्ड- जून 2026
| सेक्टर |
एनपीए खातों की संख्या |
एनपीए राशि (करोड़ रुपये) |
| कृषि क्षेत्र (प्राथमिकता) |
97,032 |
1,391.23 |
| एमएसएमई क्षेत्र (प्राथमिकता) |
30,519 |
879.94 |
| अन्य प्राथमिकता क्षेत्र |
4,719 |
93.36 |
| गैर-प्राथमिकता क्षेत्र |
37,094 |
481.99 |
| कुल |
1,69,364 |
2,846.53 |
निगरानी का अभाव : ऋण वितरण के बाद बैंकों ने लाभार्थियों के व्यवसाय या फसल का जमीनी स्तर पर सत्यापन नहीं किया। बिना फॉलो-अप के कर्ज बांटने से डिफॉल्ट का आंकड़ा बढ़ गया।
लचर नेतृत्व : जब जिले का लीड बैंक (केनरा बैंक) ही वसूली में सबसे फिसड्डी है, तो अन्य बैंकों के रिकवरी सिस्टम से बेहतर नतीजों की उम्मीद बेमानी है।
छोटे कर्जदारों की अनदेखी : 1.69 लाख खातों का एनपीए होना यह साबित करता है कि छोटे कर्जदारों से समय पर किस्त वसूलने के लिए बैंकों के पास कोई प्रभावी जमीनी तंत्र नहीं है।
जिला अग्रणी बैंक (एलडीएम) आगरा के प्रबंधक ऋषिकेश बनर्जी ने बताया कि लीड बैंक की शाखाएं ज्यादा हैं और ऋण वितरण भी सबसे अधिक है, इसी वजह से उनका एनपीए भी ज्यादा है। अब ऋण वितरण में सख्ती बरती जाएगी। ऐसे लोग जिन्होंने कर्ज नहीं चुकाया है, उन्हें भविष्य में ऋण नहीं मिलेगा। उनका सिबिल स्कोर खराब हो जाएगा। केसीसी और एमएसएमई में डिफॉल्टरों की संख्या अधिक है। रिकवरी के लिए आरसी जारी कर संपत्तियां कुर्क और नीलामी के जरिए बकाया वसूली का प्रावधान है। -,,