रावण के के स्वरूप के सात पूजा करते लंकेश मंडल के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा में लंकेश भक्त मंडल के सदस्यों ने शुक्रवार को विजयदशमी पर्व पर यमुना किनारे स्थित शिव मंदिर में भगवान शिव की स्तुति कर दशानन की महाआरती उतारी। उन्होंने दशहरे पर रावण के पुतला दहन का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि खुद को राम भक्त कहने वाले लोग आज उनके आदर्शों का अनादर कर रहे हैं। जो लोग रावण का पुतला दहन करते हैं उनका न तो राम जैसा चरित्र है और न ही राम जैसा एक भी गुण है। पुतला दहन करने वाले ब्रह्म हत्या के दोषी हैं।
लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने कहा कि भगवान श्रीराम ने दशानन को अपना आचार्य बनाया था। लंका पर विजय प्राप्ति का आशीर्वाद श्वेत बंधु रामेश्वरम की स्थापना के समय लिया था।
श्रीराम ने नहीं किया रावण का अपमान
श्रीराम ने कभी रावण का अपमान नहीं किया था, एक महायोद्धा की भांति युद्ध कर दशानन पर विजय प्राप्त की थी। हिन्दू संस्कृति के अनुसार एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार एक बार ही किया जाता है। बार-बार उसके पुतला दहन नहीं किए जाते।
उन्होंने कहा कि रावण महाज्ञानी थे। उनके मुकाबले तीनों लोकों में कोई भविष्य ज्ञाता नहीं था। उन्होंने अपनी मर्यादाओं का पालन करते हुए सीता मैया को सुरक्षित अशोक वाटिका में रखा था। जो लोग रावण का पुतला दहन करते हैं, वो ब्रह्म हत्या के दोषी हैं।
इस अवसर पर लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट के साथ संजय सारस्वत, गजेन्द्र सारस्वत, रमाकांत, सुनहेरी लाल, देवेन्द्र सारस्वत, अजय कुमार सारस्वत, किशन सारस्वत, नीरज एवं सुमित आदि उपस्थित थे।