आगरा के महताब बाग स्थित ग्यारह सीढ़ी पार्क की जिस भूमि को किसानों ने कानूनी जंग से जीता था, उसे प्रशासन फिर छीन रहा है। 49 साल पुराने अर्बन सीलिंग वाद को पुनर्स्थापन करते हुए काश्तकार को नोटिस जारी किए हैं। शासकीय भूमि को क्षति पहुंचाने के आरोप में उसका कब्जा रोक दिया गया है।
कछपुरा, नगला देवजीत निवासी मुन्ना लाल ने बताया कि उनके पिता रूप सिंह व ताऊ नत्थी लाल (मौजा चकहफ्तम स्थित खसरा संख्या 608, 610, 613, 614 व 615 कुल रकबा 6 बीघा 8 विस्वा) काश्तकार थे। 1976 में अर्बन सीलिंग में उनकी जमीन चली गई। जिसके विरुद्ध उन्होंने सिविल वाद दायर किया। वर्ष 1998 में जिला जज न्यायालय ने काश्तकार के हक में फैसला सुनाया। खसरा-खतौनी में किसानों के नाम चढ़ गए। अक्तूबर में किसानों ने 6 बीघा जमीन पर कब्जा लिया।
ट्रैक्टर से ग्यारह सीढ़ी पार्क के एक हिस्से में जुताई के बाद बैरिकेडिंग कराई। दूसरी तरफ जिस भूमि पर किसानों ने कब्जा लिया था। उसके बराबर से गाटा संख्या 606/470 में एडीए ने स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया है। किसानों का आरोप है कि एडीए व प्रशासन के अफसर दबाव डाल रहे हैं। जमीन पर फसल बुआई या अन्य कोई गतिविधि करने से रोक गए हैं। केस दर्ज कराने व जेल भिजवाने की धमकी भी दी गई। पार्क के दूसरे हिस्से में संरक्षित स्मारक ग्यारह सीढ़ी है। जिसके बराबर से एडीए स्वामित्व की भूमि है।