इनर रिंग रोड के लिए भू-अधिग्रहण में जमीन के बदले जमीन की मांग को लेकर तीन दिन से अनशन पर बैठे ताजगंज महुआ खेड़ा के जोेगेंद्र सिंह का गुस्सा फूट पड़ा। सुनवाई न होने से आहत होेकर वह पावर ग्रिड के पोल पर चढ़ गया। उसके जान देने के एलान से गांववालों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। साढ़े सात घंटे तक भूख-प्यास से बेहाल किसान अपने हक की मांग करता रहा। अधिकारियों के काफी मान-मनोव्वल के बाद नीचे उतारा जा सका।
जोगेंद्र सिंह (40) पुत्र रामभरोसी ने बताया कि गांव में उनके परिवार की तकरीबन पक्के पौने चार बीघा जमीन (खेत) का साल 2013 में अधिग्रहण किया गया। अगस्त 2014 में प्रति बीघा 14.92 लाख रुपये के हिसाब से मुआवजा मिला। बोला कि, गत दिनों सौदान सिंह और सरस्वती की जमीन का अधिग्रहण जमीन के बदले किया गया। जोगेंद्र का कहना है कि अगर ऐसा नहीं कर सकते तो चार गुना मुआवजा मिले। वह तीन दिन से निर्माणाधीन इनर रिंग रोड पर गांव के किताब सिंह, महाराज सिंह, जगदीश, नरायन बाबा, लंबरदार के साथ अनशन पर बैठा था। अधिकारी तो आए लेकिन सुनवाई नहीं की।
रविवार तड़के तकरीबन छह बजे जोगेंद्र पावर ग्रिड की लाइन के पोल पर 20 मीटर ऊंचाई तक चढ़ गया। उसे देखने लोगों की भीड़ जुटने लगी। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सीओ सदर असीम चौधरी, एसडीएम सदर पी दिनेश ने बात की। फायरब्रिगेड कर्मियों को भी बुला लिया। जोगेंद्र और ऊपर चढ़ने लगा तो सनसनी फैल गई। एडीएम (एफआर) राजकुमार और एसपी सिटी समीर सौरभ भी पहुंचे। उन्होंने किसान के भाई शिवशंकर से बात की। आश्वासन दिया कि सोमवार को ग्रामीण आफिस में आकर अपना पक्ष रखें। इसके बाद दोपहर डेढ़ बजे जोगेंद्र को उतारा जा सका। सपा जिलाध्यक्ष राम सहाय यादव भी पहुंच गए। उनका कहना था कि प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
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अधिग्रहण से छह गांव के ग्रामीण हुए प्रभावित
गांव महुआ खेड़ा में 40 ग्रामीणों की जमीन का अधिग्रहण किया गया। आधा दर्जन किसान ऐसे हैं, जिन्होंने जमीन नहीं दी। कोर्ट से स्टे ले लिया। अब इन किसानों को जमीन के बदले जमीन दी जा रही है। ग्रामीण पप्पू ने बताया कि भूमि अधिग्रहण से बुढे़रा, महुआ खेड़ा, एत्मादपुर मदरा, कांकरपुरा, महल आदि गांव प्रभावित हुए हैं। उनकी एक बीघा जमीन को बिल्डर तकरीबन एक करोड़ रुपये में खरीदते हैं। मगर, मुआवजा सर्किल रेट के हिसाब से अदा किया गया। जमीन जाने से कई किसान भूमिहीन हो गए हैं।
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भूमिहीन हुए तो करनी पड़ रही मजदूरी
जोगेंद्र ने बताया कि बड़े भाई सतीश और छोटे शिवशंकर के अलावा मां फूलन देवी का जमीन में हिस्सा था। वह सभी खेती करके घर का गुजारा करते थे। भूमि लेते समय लेखपाल ने आश्वासन दिया था कि पेंशन दी जाएगी। परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी मिलेगी। मगर, कुछ नहीं हुआ। मजदूरी करके परिवार का पेट पालना पड़ रहा है। उसके चार बच्चे नरेंद्र, अवधेश, अंजू और गिर्राज हैं। यही हाल दोनों भाइयों के परिवार का भी है।
सपा नेता ने धमकाया, लेखपाल की सांठगांठ
जोगेंद्र ने सीओ सदर को बताया कि उनकी जमीन लेने के लिए गांव के एक सपा नेता ने धमकाया था। लेखपाल ने भी उनसे सांठगांठ कर ली। वह अपनी जमीन नहीं देना चाहता था तो बेटे नरेंद्र को धमकाया। डर के चलते वह कुछ नहीं बोल पाए। पुलिस से भी शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उधर, पोल पर चढ़े जोगेंद्र ने सपा नेता की शिकायत की तो नेता का रिश्तेदार भड़क गया। पुलिस के सामने ही दोनों में गालीगलौज हो गई। पुलिस और ग्रामीणों ने दोनों को रोका।
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हक के लिए सावित्री ने भी उठाया था यह ‘कदम’
गांव में नाली-खड़ंजा की मांग पर तहसील दिवस में भी सुनवाई न होने पर मनकेड़ा पंचायत के गांव नगला कारे की सावित्री देवी पुलिस लाइन में ओवर हेड टैंक पर चढ़ गई थी। जान देने का एलान किया था। दो घंटे बाद अफसर उसे नीचे उतारने मेें सफल हो पाए थे।