आगरा के बालूगंज स्थित डीआईजी (अब आईजी) रेंज के बंगले की भूमि की दो बार सौदेबाजी का मामला शासन तक पहुंच गया है। जिस जमीन का सौदा करने की बात कही जा रही है, वह बंगले की चहारदीवारी के भीतर है। इस मामले में कई लोग और फंस सकते हैं। नामांतरण कराने वाले तहसीलकर्मियों पर भी कार्रवाई होगी।
आगरा के बालूगंज स्थित बंगला करीब 6 बीघा 16 बिस्वा में है। सन 1957 से यह भूमि पुलिस विभाग (डीआईजी पुलिस) के अध्यासन में है। इस भूमि के खेवट संख्या में 15 में हबीब उर उहमान का नाम दर्ज था। शेष भूमि नजूल भूमि है। अभिलेखों में पहले भूस्वामी के रूप में खलीलुल रहमान खां का नाम दर्ज कराया गया। उसके बाद वसीयत के आधार पर मार्च 2024 में धौलपुर हाउस निवासी इकबाल खां, फैसल खां, मोहम्मद सलीम खां, इरशाद खां, दिलशाद खां, फिरोज खां के नाम नामांतरण हुआ। तत्कालीन आईजी रेंज दीपक कुमार ने अगस्त, 2024 में तहसीलदार न्यायिक को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद नामांतरण निरस्त हो सका।
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सोमवार को रकाबगंज थाने में कमला नगर निवासी सौरभ बंसल ने इसी जमीन की खरीद में केस दर्ज कराया। इसमें कपिल अग्रवाल, सनी जैन और प्रशांत जैन को नामजद किया। सौरभ बंसल बिग डैडी फर्म का डायरेक्टर है। उसका आरोप है कि आरोपियों ने यह जमीन उन्हें बताई थी। उसने 1.20 करोड़ में एग्रीमेंट किया था। इस मामले में सौरभ बंसल का भी फंसना तय है। माना जा रहा है कि अपने आप को बचाने के लिए उसने केस दर्ज कराया। दूसरी ओर, आईजी रेंज के बंगले की जमीन के एग्रीमेंट का दूसरा केस प्रतीक्षा एन्क्लेव, दयालबाग निवासी राकेश कुमार ने दर्ज कराया था।
सौदे के बाद 30 लाख का दिया था बयाना
इस जमीन का 25 जून, 2024 को तहसील में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट हुआ था। कमला नगर निवासी सौरभ बंसल और ट्रांसयमुना काॅलोनी शाहिद रजा खरीदार थे। 12 करोड़ रुपये में 6,890 वर्ग गज जमीन का सौदा हुआ था। एग्रीमेंट के समय 30 लाख रुपये बयाना दिया गया था। 24 लाख रुपये के स्टांप आए थे। जमीन के विक्रेता 10 लोग थे। पुलिस को जो एग्रीमेंट मिला है उसमें बेचने वालों के रूप में नाई की मंडी निवासी इकबाल खां, फिरोज खान, फैजल खान, दिलशाद खा, इरशाद, अजरा खान, अलीशा खान, अलीवा खान, हीबा खान, सना खान हैं। बेलनगंज निवासी प्रशांत जैन और छीपीटोला निवासी राजीव कुमार जैन गवाह हैं। एग्रीमेंट के समय 30 लाख का भुगतान ड्राफ्ट से किया गया था। डीआईजी रेंज शैलेष पांडेय पूरे प्रकरण को लेकर गंभीर हैं। इस मामले में खरीदार और विक्रेता दोनों आरोपी बनेंगे। नामांतरण कराने वाले तहसील कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।