फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां जार में कैद हैं मौत के 400 राज, वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

Thu, 24 May 2018 01:44 PM IST
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
demo pic - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विधि विज्ञान प्रयोगशाला के टॉक्सिकोलॉजी सेक्शन में रखे जारों में मौत के 400 राज कैद हैं। इनसे पर्दा कब तक उठ पाएगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है। 
विज्ञापन


कारण यह है कि लैब में 28 जिलों से विसरा आ रहे हैं जबकि स्टाफ लगातार कम होता जा रहा है। आलम यह है कि अगर आज विसरा भेजा जाए तो इसकी रिपोर्ट आने में कम से कम तीन से चार महीने लगेंगे। 

वह भी तब जबकि पुलिस अफसर लगातार रिमाइंडर भेजें। अगर पुलिस ने दिलचस्पी नहीं ली तो हो सकता है कि एक या ज्यादा साल भी लग जाएं। कुछ दिन पहले तक तो हालत यह थी कि तीन तीन साल पुराने केस लंबित चल रहे थे। 
विज्ञापन
Trending Videos

लैब में 128 पद स्वीकृत हैं जबकि तैनाती 64 की भी नहीं है। यही हाल टॉक्सिकोलॉजी का है। यहां भी 50 फीसदी पद खाली हैं। वैज्ञानिक, लैब टेक्नीशियन के पद खाली हैं। 

कुछ प्रमोशन होने पर बाहर चले गए तो कुछ का तबादला कर दिया गया। प्रदेश में नई लैब खोली जा रही हैं, लेकिन उनके लिए स्टाफ की नई भर्ती नहीं की जा रही। 

इस कारण आगरा, वाराणसी और लखनऊ लैब से ही स्टाफ भेजा जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि परीक्षण में देरी हो रही है।
विज्ञापन

ये हैं कुछ अहम केस 

सेवानिवृत्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ. केसी अग्रवाल के शव के पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए भेजा गया। सात दिन में इसका नंबर ही नहीं आया परीक्षण के लिए।

शाहगंज के खेरिया मोड़ स्थित एक घर में मां-बेटी का कंकाल मिला। यह भी विसरा जांच के लिए भेजा गया। एक साल में रिपोर्ट नहीं आई।

गाजियाबाद के इंद्रापुरम में नीरज और रूचि बाथरूम में मृत अवस्था में मिले। इस मामले में पांच मई को आगरा लैब में विसरा आए। इनका परीक्षण अभी तक नहीं किया गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें