नगर निगम चुनाव के लिए राजनीतिक दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। क्योंकि नए परिसीमन ने उनका पुराना गणित बिगाड़ दिया है। तमाम मोहल्ले इधर से उधर हो गए हैं। जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों का चुनाव भी नए सिरे से होगा। ऐसे में पिछला चुनाव जीत चुके कई प्रत्याशियों की छुट्टी तो कइयों के वार्ड बदल सकते हैं। आरक्षित होने वाले वार्ड 27 अप्रैल के बाद ही तय हो पाएंगे। इसके बाद ही राजनीतिक दल प्रत्याशियों के चयन पर मशक्कत कर सकेंगे।
इस चुनाव में नगर निगम के दस वार्ड बढ़ गए हैं। अब कुल 100 वार्ड होंगे। अब तक शहर में 90 वार्ड थे। ऐसे में पुराने वार्डों का पुनर्गठन नए परिसीमन के आधार पर किया जा रहा है। पुराने वार्डों के कई मोहल्ले दूसरे वार्डों में शिफ्ट हो गए हैं। पूर्व के कुछ वार्ड इस बार अनारक्षित हो सकते हैं तो सामान्य वार्ड आरक्षित हो सकते हैं। 33 फीसदी वार्ड महिलाओं के लिए भी आरक्षित होने हैं। इसके लिए वार्डवार जातिगत सर्वे कराया जा रहा है। इसके आधार पर ही वार्डों का आरक्षण तय होगा। ऐसे में भाजपा सहित बसपा, सपा और कांग्रेस को अपने प्रत्याशियों में फेरबदल करना पड़ेगा। नये परिसीमन के मुताबिक वर्ष 2012 का चुनाव जीत चुके कुछ प्रत्याशियों को अपना क्षेत्र बदलना पड़ सकता है। उपनगर आयुक्त अनिल कुमार के अनुसार, वार्डों का सर्वे कराया जा रहा है। 27 अप्रैल के बाद ही आरक्षण तय हो पाएगा।