देश की निजी कंपनियों के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलटी (सीएसआर) फंड का गबन कर विदेश भेजने के मामले की आयकर विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि मथुरा, भीलवाड़ा और अहमदाबाद के जिन तीन ट्रस्टों ने अब तक पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा चीन, हांगकांग, सिंगापुर, मलयेशिया और दुबई भेजे, वह केवाईसी व सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर आम लोगों से उनके दस्तावेज हासिल करते थे।
इसके लिए बाकायदा सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कैंप भी लगाए जाते थे। फिर वहां लोगों से दस्तावेज व फोटो लेकर बैंक खातों से लेकर शेल कंपनियां तक खोली जातीं और करोड़ों का लेनदेन होता। विभाग को इस संबंध में कई पुख्ता साक्ष्य हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस बात की भी जांच की जा रही है कि लगातार कई वर्षों से इन ट्रस्टों के खातों में रकम आती-जाती रही लेकिन बैंकों ने कभी कोई संदेह या सवाल क्यों नहीं किया।
रकम शेल कंपनियों को भेजी जाती और वहां से विदेश में ट्रांसफर होती। अब एजेंसी हर उस व्यक्ति से संपर्क कर रही है कि जिसके नाम व पते पर शेल कंपनियां पंजीकृत हैं। इसके बाद जांच अधिकारी बैंक अधिकारियों से खातों की केवाईसी के संबंध में संपर्क करेंगे।
बता दें, प्रधान आयकर निदेशक अन्वेषण कानपुर की आगरा यूनिट ने मथुरा के राधावैली निवासी सीए आशुतोष अग्रवाल के ठिकानों पर सर्च की तो इस मामले का खुलासा हुआ था। इसके बाद जांच अधिकारियों ने हर साल करोड़ों का सीएसआर फंड लेने वाले मथुरा के जन जागृति सेवा संस्थान, अहमदाबाद के रागिनी बेन विपिन चंद्र सेवा कार्य ट्रस्ट और भीलवाड़ा के बृज मोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान के ठिकानों पर तलाशी ली। वहां से मिली जानकारी के बाद मुंबई निवासी सीए पंकज सोमानी और कोलकाता निवासी सीए सुप्रियो साहा के ठिकानों को खंगाला। फिलहाल टीमें हर कड़ी को जोड़ते हुए जांच की आगे की दिशा तय करने में जुटी हैं।