फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये मीर की बस्ती है ग़ालिब का घराना है

Sun, 21 Feb 2016 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
विज्ञापन
विज्ञापन
ताज महोत्सव में शनिवार की रात कुल हिंद मुशायरे के नाम रही। ‘मीर ओ गालिब कुल हिंद मुशायरे’ में पहुंचे शायरों ने देर रात तक शेर ओ शायरी की।  शायरों ने मीर और ग़ालिब के शहर में कभी मुहब्बत का कलाम पढ़ा तो कभी वतन की मुहब्बत बयां कीं। मुशायरे की शमां डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति मोहम्मद मुजम्मिल ने रोशन की। मुख्य अतिथि कमिश्नर प्रदीप भटनागर रहे।
विज्ञापन

ऐना देहलवी ने नज़्म पढ़ी कि उर्दू को मैं हिंदी के हवाले कर दूँ। ये मीर की बस्ती है ग़ालिब का घराना है।
अपने अलग अंदाज में ताहिर फ़राज़ ने नज़्म सुनाई
आईने में जो बाल आया है तुमने क्या मुस्करा के देख लिया।
रुख देखकर चलके हवा पर चल के देख लिया
दो कदम लड़खड़ा के देख लिया
मंजर भोपाली ने सुनाया
आपके बास्ते जख्मो को खुला रखा है
इन खुले जख्मों पर मरहम तो लगा जाते
पॉपुलर मेरठी ने माहौल को संजीदगी से बदलकर ठहकों में बदल दिया। उन्होंने सुनाया
थाने में रह गई या तेरे घर के सामने
झुक के देखता हूँ जवानी कहाँ गई


सूरसदन में खचाखच, शिल्पग्राम खाली
आगरा। ताज महोत्सव में फ्लॉप प्रयोग करने वाले अधिकारियों ने मुशायरे और कवि सम्मेलन के दर्शक भी छीन लिए। कम भीड़ की पैरवी करने वाले अधिकारियों ने अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और कुल हिंद मुशायरे को पिछले साल से शिल्पग्राम में करना शुरू किया, वैसे ही इसके श्रोता दूर हो गए। सूरसदन में मुशायरा होने पर रात से सुबह तक यह श्रोताओं से खचाखच रहता था, लेकिन शिल्पग्राम में पिछले साल भी मुशायरे को श्रोता नहीं मिल पाए। सूरसदन के मुकाबले शनिवार को हुए मुशायरे में बेहद कम लोग पहुंचे। जो पहुंचे भी, वह रात 12 बजे के बाद घर जाना शुरू हो गए। दरअसल, शिल्पग्राम के शहर से दूर होने के कारण कमला नगर, सिकंदरा, आवास विकास, एमजी रोड, जयपुर रोड, यमुना पार, शाहगंज, अर्जुन नगर की ओर के श्रोता नहीं पहुंच पाते।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें