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आगरा कथा: निहत्थे हुमायूं को मशक के सहारे पार कराई थी नदी, जानिए झुनझुन कटोरा का इतिहास

Thu, 22 Jul 2021 12:18 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

पुरातत्व विभाग का कहना है कि यह मकबरा पर्शिया में जन्मे महान इस्लामिक संत मौलाना हसन का है, जो सिकंदर लोदी और सलीम शाह सूरी के समय में आगरा में निवास करते थे। 
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आगरा कथा: झुनझुन कटोरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हुमायूं जब शेरशाह सूरी से जंग हार गया और अपनी जान बचाने के लिए घोड़े पर सवार होकर भाग रहा था। कुछ ही दूरी पर एक नदी आई, उसमें उसका घोड़ा डूब कर मर गया। तब निहत्थे हुमायूं को निजाम भिश्ती ने अपने मशक के सहारे नदी पार कराई थी। 

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हुमायूं जब दोबारा शासन में आया तो उसने निजाम की खोज खबर करवाई और वह मिल भी गया। उसकी इच्छा पर उसे ढाई दिन के लिए बादशाह बनाया गया। निजाम भिश्ती ने अपने मशक के टुकड़े कटवा कर सिक्कों के रूप में जारी किया। मुगल कालीन इतिहास में इस घटना को अहसान मंदी के रूप में लिखा गया है। इसका चर्चा अकबरनामा में भी की गई है। निजाम के इंतकाल के उसको सम्मान देने के लिए गोल गुंबद वाला एक छोटा सा मकबरा बनवाया गया। तब वहां राहगीरों के लिए पानी भर कर एक मशक रखी रहती थी। पानी पीने के लिए एक चांदी का कटोरा रखा रहता था। लोग भेंट स्वरूप कटोरी में कौड़ियां डाल जाते थे, जो कि कटोरा हिलाने पर झुनझुने की तरह बजते थे। इसीलिए लोगों की जुबान पर झुनझुन कटोरा नाम चढ़ गया।

कुछ अस्पष्ट इबारत लिखी दिखती हैं
पुरातत्व विभाग का कहना है कि यह मकबरा पर्शिया में जन्मे महान इस्लामिक संत मौलाना हसन का है, जो सिकंदर लोदी और सलीम शाह सूरी के समय में आगरा में निवास करते थे। इस गुंबद पर पर्शियन भाषा में अभी भी कुछ अस्पष्ट इबारत लिखी दिखती हैं। ईंट और चूने से बना और प्लास्टर हुआ यह षष्टकोणीय मकबरा उस इस्लामिक विद्वान की स्मृति में बना था, जिनका सन 1546 में देहावसान हुआ था। यह तथ्य वहां अभी भी अंकित है।
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