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किशनी में नहीं खिला कमल, सरपट दौड़ती रही साइकिल

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मैनपुरी। सपा के गढ़ में विपक्षी दलों के लिए फतह आसान नहीं है। पिछले छह विधानसभा चुनावों में कोई भी दल किशनी में सपा का तिलिस्म नहीं तोड़ पाया है। भाजपा के लिए किशनी विधानसभा सीट बंजर जमीन जैसी रही है, यही कारण है कि यहां आज तक कमल नहीं खिला। छह विधानसभा चुनाव से यहां साइकिल दौड़ रही है।
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मैनपुरी की किशनी विधानसभा सीट 1962 में अस्तित्व में आई। अब तक इस सीट पर 15 चुनाव लड़े जा चुके हैं। हर चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। कभी भाजपा दूसरे नंबर पर रही, तो कभी तीसरे पायदान पर। मोदी लहर में भी कमल दल वाले सपा का तिलिस्म नहीं तोड़ सके। 1993 से ही इस सीट पर सपा काबिज है। 2022 का चुनाव भी इस सीट पर दिलचस्प होगा। सपा इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की कोशिश में है। वहीं भाजपा इस सीट को सपा से छीनने के लिए चक्रव्यूह रच रही है। हर दल के नेता इस सीट पर जोरआजमाइश कर रहे हैं।
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पांच बार कांग्रेस ने जीता चुनाव
किशनी विधानसभा सीट पर 15 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इस सीट पर कांग्रेस ने पांच चुनाव जीते हैं। 1985 के बाद से इस सीट पर कांग्रेस चुनाव नहीं जीत सकी है।
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भारतीय जनता पार्टी 6 अप्रैल 1980 को बनी। अब तक भाजपा किशनी विधानसभा सीट पर दस चुनाव लड़ चुकी है। वर्ष 1980, 1985 और 1989 में भाजपा तीसरे पायदान पर रही। वर्ष 1991, 1993 में भाजपा दूसरे स्थान पर रही। वर्ष 1996 में भाजपा तीसरे, 2002 में दूसरे, 2007 में तीसरे, 2012 में तीसरे और 2017 में दूसरे नंबर पर रही।
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मतदाता
167393- पुरुष
142271- महिला
309677- कुल
किशनी विधानसभा सीट पर चुने गए विधायक
वर्ष विधायक
1962 गनेश चंद्र, कांग्रेस
1967 एसआर सिंह, एसएसपी
1969 शिवबक्स सिंह, कांग्रेस
1974 मुंशीलाल, कांग्रेस
1977 हाकिम लाल, जेएनपी
1980 मुंशीलाल, कांग्रेस
1985 रामसिंह, कांग्रेस
1989 रामेश्वर दयाल, जनता दल
1991 रामेश्वर दयाल, जनता पार्टी
1993 रामेश्वर दयाल, सपा
1996 रामेश्वर दयाल, सपा
2002 संध्या कठेरिया, सपा
2007 संध्या कठेरिया, सपा
2012 बृजेश कठेरिया, सपा
2017 बृजेश कठेरिया, सपा
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