मैनपुरी। विकास खंड मैनपुरी के प्राथमिक विद्यालय महुअन पर तैनात प्रधानाध्यापिका किरन शाक्य ने विद्यालय में हरियाली पैदा कर दी है। बच्चों की तरह ही उन्हें पेड़-पौधों से इस कदर प्यार है कि गर्मियों के अवकाश में भी प्रत्येक दूसरे दिन विद्यालय पहुंचकर पौधों को पानी देती हैं। समय-समय पर पेड़ पौधों की कटाई-छंटाईं का कार्य भी स्वयं करती हैं।
प्रधानाध्यापिका किरन शाक्य पर्यावरण रक्षा का संदेश दे रही हैं। उनके द्वारा विद्यालय प्रांगण में 50 से अधिक प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनकी देखभाल वे स्वयं करती हैं। पौधों की बच्चों की तरफ देखभाल करने वाली किरन स्वयं ही पौधों में पानी लगाती हैं। गर्मियों के अवकाश में भी हर दूसरे दिन पौधों को पानी देने स्कूल पहुंच रही हैं। उनकी मेहनत का नतीजा है कि विद्यालय में बच्चों के साथ पौधों का भी गुलशन सजा हुआ है। यहां की फुलवारी देखने योग्य है। पूर्व बीएसए भी उन्हें इसके लिए बधाई दे चुके हैं। दी।
हैंडपंप से लाती हैं पानी
विद्यालय में बिजली का कनेक्शन नहीं है। इसके कारण यहां लगा सबमर्सिबल भी नहीं चलाता है। ऐसे में किरन हैंडपंप से पानी लाकर पौधों को देती हैं।
पैदल पहुंचीं थीं स्कूल
कोरोना संक्रमण के दौरान अघोषित कर्फ्यू में भी किरन ने पौधों की देखभाल की। इसके लिए उन्हें एक तरफ से स्कूल की साढ़े तीन किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। प्रत्येक तीसरे दिन वे स्कूल जाना नहीं भूलतीं।
इन प्रजातियों के पौधे लगाए
मधुमालती, बुलबुल चश्म, अपराजिता, परिजात पुष्प, गुडहल (लाल, गुलाबी, पीला, सफेद), सदाबहर, चंपा, बेला, कनेर (लाल, गुलाबी, पीला), चांदनी, गुलाब, तुलसी, रामा-श्यामा, नागराज, ब्रह्मकमल, अशोक, ऐलोबेरा, बौंगन विलिया, कड़ी पत्ता, गुलदाउदी, गेंदा, मौसमी, अनार, आम, साइकस, जामुन, नीबू, पॉमट्री, मोरपंखी, रतआलू, सेम, गिलोय आदि।
पर्यावरण में पौधों का बड़ा महत्व है। पौधों के बिना पर्यावरण की रक्षा नहीं हो सकती। पौधों के बिना मानव का जीवन भी संभव नहीं है। पर्यावरण रक्षा के लिए ‘अमर उजाला’ अभियान चला रहा है सभी लोग इस अभियान से जुड़कर पर्यावरण की रक्षा में सहयोग प्रदान करें।
-किरन शाक्य, प्रधानाध्यापिका