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किडनी मरीजों को सौगात: आगरा के एसएन मेडिकल काॅलेज में ट्रांसप्लांट शुरू, इन रोगियों को मिलेगी निशुल्क सुविधा

Sat, 22 Aug 2026 08:36 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

एसजीपीजीआई की टीम ने सुबह 10 बजे ऑपरेशन करना शुरू किया। सबसे पहले दाता की किडनी निकाली गई और फिर मरीज के लगाई गई। प्रक्रिया में कुल आठ घंटे का समय लगा। शाम छह बजे तक दोनों की सर्जरी हो गई और फिर उन्हें आइसोलेट चैंबर में रखा गया। 
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एसएन मेडिकल कॉलेज
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विस्तार
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किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए शनिवार को एसएन मेडिकल कॉलेज उम्मीद की नई किरण बन गया। एसजीपीजीआई लखनऊ की टीम की निगरानी में पहला किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। ये सुविधा शुरू होने से आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। एसएन मेडिकल कॉलेज किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला प्रदेश का दूसरा सरकारी चिकित्सा संस्थान बन गया।
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किडनी ट्रांसप्लांट के लिए एसजीपीजीआई की टीम शुक्रवार को ही पहुंच गई थी। दो मरीजों की चिकित्सकीय रिपोर्ट जांचने के बाद शनिवार को सिकंदराराऊ निवासी महेंद्र कुशवाहा (32) की किडनी ट्रांसप्लांट की गई। उन्हें पत्नी मीना कुशवाहा ने किडनी दी। एसजीपीजीआई की टीम ने सुबह 10 बजे ऑपरेशन करना शुरू किया।

 

सबसे पहले दाता की किडनी निकाली गई और फिर मरीज के लगाई गई। प्रक्रिया में कुल आठ घंटे का समय लगा। शाम छह बजे तक दोनों की सर्जरी हो गई और फिर उन्हें आइसोलेट चैंबर में रखा गया। दूसरे मरीज का ट्रांसप्लांट अगले चरण में किया जाएगा। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मेडिकल काॅलेज के लिए ये ऐतिहासिक दिन है। हम अंग प्रत्यारोपण की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। भविष्य में हार्ट, फेफड़े, लिवर समेत अन्य अंगों का प्रत्यारोपण भी हो सकेगा। शुरू के कुछ ऑपरेशन एसजीपीजीआई की टीम की निगरानी में होंगे। 

बाद में स्थानीय टीम ही ट्रांसप्लांट करेगी। इससे पहले प्रदेश में सिर्फ एसजीपीजीआई लखनऊ में ही किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा थी। सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के किडनी रोग विभाग को ट्रांसप्लांट से पहले सैनिटाइज किया गया। ऑपरेशन थिएटर में नो एंट्री जोन बनाया गया। एसजीपीजीआई और एसएन की कुल 30 सदस्यीय चिकित्सकीय टीम शामिल रही।

 
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निशुल्क हुआ ऑपरेशन, निजी अस्पताल में 10-15 लाख का खर्च
किडनी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि दोनों मरीजों का असाध्य रोग योजना के तहत चयन हुआ है। पहले मरीज की तरह ही दूसरे मरीज का भी निशुल्क ऑपरेशन किया जाएगा। आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री राहत कोष योजना के तहत भी निशुल्क सुविधा मिलेगी। सामान्य मरीज के लिए ढाई लाख रुपये शुल्क है। निजी अस्पतालों में 10-15 लाख रुपये का खर्च होते हैं। डायलिसिस की सुविधा पहले से ही है।

टीम में ये रहे शामिल
एसजीपीजीआई की टीम: यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. एमएस अंसारी, डॉ. संजय कुमार सुरेका, डॉ. आशीष रंजन, डॉ. मानस रंजन बेहरा, डॉ. तपस कुमार सिंह, डॉ. बी. मोहन कुमार, नर्सिंग स्टाफ सोसाकुट्ट विल्सन, विजय कुमार, आकांक्षा गौतम।
एसएन की टीम: किडनी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन, डॉ. मुदित खुराना, डॉ. कैरवी भारद्वाज, यूरोलॉजी विभाग से डॉ. प्रशांत लवानियां, डॉ. अंकुश गुप्ता, डॉ. विजय त्यागी, डॉ. प्रदीप देव, डॉ. अभिषेक पाठक, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. योगिता द्विवेदी, डॉ. अर्चना अग्रवाल, डॉ. राजीव पुरी, डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. प्रवीण पांडे, डॉ. स्वाति चौधरी और नर्सिंग स्टाफ में प्रदीप कुमार त्यागी, मेघा सिंह, प्रिया शर्मा, अलका यादव, वर्तिका, सुचेता और विपेंद्र सिंह।

तीन राज्यों के मरीजों को मिलेगा लाभ
एसएन में सुविधा शुरू होने से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान के मरीजों को अधिक लाभ मिलेगा। यहां राजस्थान के धौलपुर, भरतपुर, राजाखेड़ा और मध्यप्रदेश के ग्वालियर, मुरैना के अलावा यूपी के आगरा, अलीगढ़ और कानपुर मंडल के मरीज इलाज कराने आते हैं। ट्रांसप्लांट के लिए अभी 12 मरीजों का पंजीकरण हो चुका है।


 
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