आगरा। होली की दौज मेेले में हुए बवाल के बाद खेरागढ़ थाना फूंकने और पुलिस की चार जीप और दो बाइक जलाने के मामले में शनिवार को अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। एडीजे-15 राजीव कुमार पालीवाल ने पूर्व चेयरमैन सहित 17 दोषियों को 7-7 साल कारावास के साथ सभी को 36,200 से 36,200 रुपये के तक जुर्माने की सजा सुना दी। मामले में 16 दोषियों को जेल भेज दिया और फरार आरोपी रामेंद्र उर्फ कलुआ की गिरफ्तारी के आदेश दिए। वहीं 21 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया। अन्य की मुकदमे के विचारण के दौरान मौत हो गई।
घटना 23 मार्च, 2008 की है। बसई जगनेर के तत्कालीन थानाध्यक्ष विक्रम सिंह तोमर पुलिस टीम के साथ खेरागढ़ में लगे दौज मेले के जुलूस की ड्यूटी पर थे। उस दौरान तत्कालीन चेयरमैन अनिल कुमार उर्फ अन्नी ने उन्हें अपनी ट्रैक्टर एजेंसी के पास चार युवकों के झगड़े की सूचना दी। पुलिस लड़कों को शाम 8:15 बजे पकड़कर थाने ले आई। पीछे से अनिल अपने साथ बड़ी संख्या में लोगों को लेकर थाना परिसर पहुंच गया। पकड़े गए युवकों के साथ थाना परिसर में मारपीट शुरू कर दी। थानाध्यक्ष के मना करने पर अनिल ने उनसे और अन्य पुलिसकर्मियों से गाली-गलौज देकर धमकी दी। तब तक जुलूस से लौटा अन्य पुलिस बल भी थाने पर आ गया। उस दौरान अनिल ने भीड़ को उकसा दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस पर ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। लाइसेंसी और अवैध हथियारों से जान से मारने की नीयत से गोलीबारी कर दी। थाने के बैरक के दो कमरों में आग लगा दी। पुलिस की चार जीप और दो बाइकों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने 59 आरोपियों के नामजद और 200-300 के खिलाफ अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज की थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से चुटैल हुए तत्कालीन एएसपी अब्दुल हमीद, सीओ राम सूरत सोनकर, सिपाही लाखन, बसई थानाध्यक्ष विक्रम तोमर सहित 9 गवाह अदालत में पेश किए गए।
होमगार्ड बना था बवाल की वजह
आगरा। खेरागढ़ में जो कुछ हुआ था, उसकी वजह होमगार्ड बना था। दरअसल जिन शराबियों ने दौज मेले में हंगामा काटा था वह गांव अयेला के बताए गए थे। होमगार्ड भी उसी गांव था। बताया जाता है कि यही वजह थी कि थाने में लाकर उनको छोड़ा जा रहा था। इसी बीच चेयरमैन के समर्थक थाने में पहुंच गए। बस वहीं पर पुलिस और चेयरमैन में विवाद हो गया। बात बढ़ी तो चेयरमैन समर्थकों ने माइक से लोगों को थाने में बवाल की जानकारी दे दी। जब तक पुलिस संभल पाती गुस्साए लोगों ने मारपीट के साथ ही थाने में तोड़फोड़ व आगजनी शुरू कर दी। पुलिस को कार्यालय बचाने के लिए फायरिंग करनी पड़ी। इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ। पुलिस ने बचाव के लिए विवाद को दो गांव के बीच का बना दिया। बस फिर तो दोनों तरफ से जमकर पथराव हुआ। लोगों की भीड़ ने थाना पुलिस को खदेड़ दिया। पुलिस के वाहनों में आग लगा दी। पुलिस ने भी इस बात को माना था।
23 मार्च 2008 को कब क्या हुआ
-रात 8 बजे दौज जुलूस में झांकियां निकलने के दौरान हंगामा हुआ। चेयरमैन के भाई के रोकने पर उसके साथ मारपीट की गई।
-8:30 बजे चेयर के थाने पहुंचकर हंगामा कर रहे युवकों के बारे में पूछने पर पुलिस ने मारपीट की। इसके बाद थाने में बवाल शुरू हुआ।
-9:15 गुस्साई भीड़ ने थाने में आग लगा दी।
-9:30 बजे पुलिस ने भीड़ को काबू रखने के लिए हवा में गोलियां चलाईं।
-10 बजे तक भीड़ ने थाना कब्जा लिया।
-22 जुलाई 2008 को आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल हुआ, उसी दिन संज्ञान हो गया।
-4 जुलाई 2026 अदालत ने सजा सुना दी
चेयरमैन सहित 17 दोषियों को हुई सजा
अदालत ने पूर्व चेयरमैन अनिल कुमार उर्फ अन्नी, उनके भाई रामअवतार उर्फ टीटू, शकील, लियाकत, ग्याप्रसाद, संजीव कुमार, ताराचंद, देशराज, हरिचंद, प्रवीण, परमाल, राजेश, राजवीर, राकेश, गुड्डू, बनबारी लाल और फरार आरोपी रामेंद्र उर्फ कलुआ सजा सुना दी।
भरतीय दंड संहिता की इन धाराओं में हुई सजा
धारा-148 में 3 वर्ष कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना
घारा-332 में 3 वर्ष कैद और 5 हजार रुपये का जुर्माना
धारा-336 में 3 माह की कैद और 200 सौ रुपए का जुर्माना
धारा-353 में 2 वर्ष की कैद और 2 हजार रुपये का जुर्माना
धारा-427 में 2 वर्ष की कैद और 2 हजार रुपये का जुर्माना
धारा-436 में 7 वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना
धारा-506 में 2 वर्ष की कैद और 2 हजार रुपये का जुर्माना
लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम में 7 वर्ष की कैद
सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करूंगा। मैंने ने ही पुलिस को घटना की जानकारी दी थी। मुझे आरोपी बना दिया। अदालत के आदेश पर पुलिस के खिलाफ भी डकैती व अन्य धाराओं का मुकदमा एडीजे-10 की अदालत में लंबित है।
-दोषी चेयरमैन अनिल कुमार उर्फ अन्नी