रकम लेने के बाद बिल्डिंग मालिक ने येरलेन को बताया कि वह भारत का निवासी नहीं है। कानूनन एक मुश्त 37 लाख रुपये ट्रांसफर नहीं कर सकता। इसलिए यह धनराशि का उप निबंधक कार्यालय फ्लैट बेचने के कागजात तैयार करने में एक साथ लेनदेन नहीं दिखाया जा सकता है।
एक नवंबर 2012 को इन लोगों ने प्रार्थी के साथ फर्जी कागजात तैयार कराकर फ्लैट नंबर 417 का जाइंट कंस्ट्रक्शन एग्रीमेंट तैयार कर प्रार्थी को एक प्रति दे दी। कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यही कागजात संपत्ति खरीद व बेचने में वैधानिक कागजात हैं। यही प्रार्थी के स्वामित्व के कागजात हैं।
फर्जी कागजात बनाने में माहिर
येरलेन कागजात लेकर फ्लैट नं. 417 श्रीवृंदावन धाम अपार्टमेंट (रशियन बिल्डिंग) रमणरेती पर कब्जा लेने गया तो वहां फ्लैट में धवल सचदेव मिला। धवल ने बताया कि फ्लैट पर उसका कब्जा है। कहा कि बिल्डिंग मालिकों द्वारा उक्त फ्लैट पर कब्जा दिलाया गया है। साथ ही उसने येरलेन को बताया कि आरोपियों ने ऐसे कई लोगों से षड्यंत्र के तहत करोड़ों रुपयों की ठगी की है।
आरोप है कि पीड़ित येरलेन ने रोमनोव, नतालिया और रमनरूपा से अपने रुपये वापस मांगे तो उन्होंने जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि वह इसी तरह बाहर के लोगों को बेवकूफ बनाकर षड्यंत्र के तहत फंसाते हैं और फर्जी कागजात तैयार कर उनका रुपया हड़प लेते हैं।
येरलेन की शिकायत पर पुलिस ने रोमनोव किवनोसोवा, नतालिया किवनोसोवा, रमनरूपा दास, दीपक शर्मा और धवल सचदेवा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। एसपी सिटी एमपी सिंह ने बताया कि अब तक धोखाधड़ी, धमकी देने, छेड़छाड़, चौथ वसूली समेत सात मामले वृंदावन थाने में दर्ज हो चुके हैं।