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लोक लाज का ख्याल और शिव की भक्ति के लिए कदमों की ताल

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महिलाओं का हौसला किसी से कम नहीं होता। उनके पथ में चाहें जो बाधाएं आ जाएं वे उन सभी बाधाओं को भी पार कर जाती हैं। ऐसा ही नजारा शिवभक्त महिला कांवड़ियों के बीच नजर आ रहा है। तमाम महिलाएं घूंघट की ओट के बीच गंगाजली और कांवड़ लेकर भक्ति की राह में गंतव्य की ओर कदमताल कर रही हैं। उनके तेजी से बढ़ते कदम देखकर तमाम लोग अंचभित होते हैं लेकिन श्रद्धा और विश्वास की डगर होती ही इतनी मजबूत है कि कोई बाधा अवरोध नहीं बन पाती। तीर्थनगरी सोरों में शिवभक्तों के बीच महिला कांविड़यों की भक्ति खूब देखने को मिल रही है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से पहुंची महिलाएं कांवड़ लेकर सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के लिए चल पड़ी हैं।
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महिला कांवड़ियों की बात-
- भोले की भक्ति से कांवड़ उठाने की प्रेरणा मिली है। यहां सोरों जी पवित्र गंगातीर्थ है। यहां आम तौर पर भी गंगास्नान को आते हैं लेकिन कांवड़ ले जाने से काफी सुखद अनुभूति मिल रही है। मन उत्साह है। भोले बाबा नईया पार करेंगे। - हिमानी, डींग, भरतपुर।
- महाशिवरात्रि का पर्व काफी धार्मिक महत्व का पर्व है। गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने पर मनोकामना पूरी होती है। परिवार में खुशहाली की कामना को लेकर भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक करेंगे। इसके लिए कांवड़ उठाकर ले जा रहे हैं। - सावित्री, भरतपुर।
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- हमारे गांव से हर बार तमाम लोग कांवड़ लेने आते हैं। इनमें महिलाएं भी होती हैं। कभी किसी तरह की बाधा कांवड़ यात्रा में नहीं रहती। वह भी कांवड़ भरकर ले जा रहे हैं और शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे- कमलेश, खेड़ा, अलवर।
- भगवान शिव कल्याणकारी हैं। उनके ही आशीर्वाद से 62 वर्ष की उम्र में कांवड़ भरने का हौंसला किया है। भोले ही हमारी यात्रा सफल करेंगे। मन में किसी तरह का कोई भय नहीं है। कांवड़ भरना विशेष सौभाग्य है। - रामवती, मुरैना।
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