केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया ने मंगलवार दोपहर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उस वक्त अपना इस्तीफा दिया, जिस समय नये मंत्री राष्ट्रपति भवन में शपथ ले रहे थे। कठेरिया का कहना है कि उन्होंने एक महीने पहले ही केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर संगठन में कार्य करने की इच्छा व्यक्त कर दी थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और बदलाव में उन्हें जगह नहीं मिल पाई है। उनकी छुट्टी कर दी गई है। कठेरिया से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि वह हमेशा संगठन में ही सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक से लेकर भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव के पद पर रहते हुए संगठन में कार्य किया। जनता की समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरकर कई बार प्रभावी आंदोलन किए। केंद्रीय राज्यमंत्री का प्रोटोकॉल तोड़कर भी कई बार जनता के हित के लिए प्रदर्शन किए। उन्होंने कहा कि मेरी पहचान ही सड़कों पर संघर्ष करने के रूप में रही है। संगठन में आकर अब उसी रूप में फिर से नजर आऊंगा।
सप्ताहभर में अहम जिम्मेदारी
इधर, बताया जा रहा है कि कठेरिया को सप्ताहभर में केंद्रीय टीम में अहम पद मिल सकता है। इसके लिए नेतृत्व ने उन्हें हरी झंडी भी दे दी है, बस औपचारिक रूप से घोषणा होना बाकी है। सूत्रों की मानें तो उन्हें उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
कार्यकर्ताओं से मिलेंगे
प्रवक्ता शरद चौहान के अनुसार, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद कठेरिया बुधवार को खंदारी स्थित अपने आवास पर सुबह 10 बजे से कार्यकर्ता और जनता से मिलकर उनकी समस्याएं सुनेंगे।
ब्रज की झोली हो गई खाली
कठेरिया के रूप में एकमात्र केंद्रीय मंत्री की भी टीम मोदी से छुट्टी
सांसद राजू भैया और राजेश दिवाकर भी नहीं बना पाए जगह
केंद्रीय मंत्रिमंडल से डा. रामशंकर कठेरिया की छुट्टी के साथ ही ब्रज की झोली खाली हो गई है। वर्ष 2014 में दिल खोलकर ब्रज की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को वोट किया था लेकिन टीम मोदी में अब ब्रज का प्रतिनिधित्व गायब हो गया है। वह भी तब, जबकि ब्रज क्षेत्र से कई सांसदों की मजबूत दावेदारी थी।
ब्रज की मथुरा, आगरा, फतेहपुरसीकरी, फीरोजाबाद, मैनपुरी, एटा और हाथरस सहित लोकसभा की सात सीटों में से पांच भाजपा के खाते में हैं। मथुरा से हेमा मालिनी, आगरा से डा. रामशंकर कठेरिया, फतेहपुर सीकरी से चौधरी बाबूलाल, एटा से राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया, हाथरस से राजेश दिवाकर रिकॉर्ड वोटों से जीते। मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए बदलाव और विस्तार में कठेरिया की छुट्टी से पहले ब्रजक्षेत्र से राजू भैया और राजेश दिवाकर में किसी एक के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की काफी चर्चा थी। दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा जिस तरह से ओबीसी और एससी वोटरों पर फोकस कर रही है, उसके हिसाब से ब्रज में इन जातियों के वोटरों पर डोरे डालने के लिए इनकी दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को राजस्थान का राज्यपाल बनाए जाने के बाद से राजू भैया को टीम मोदी में शामिल करने की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। हाल ही में उनके संसदीय क्षेत्र कासगंज में बूथ सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जिस तरह से उनकी तारीफों के पूल बांधे थे, उससे राजू भैया के मंत्री बनने की चर्चाएं और तेज हो गई थीं। एससी कोटे से कठेरिया का मंत्री पद छिनने के बाद से हाथरस के सांसद राजेश दिवाकर को इस कोटे से मंत्री बनाया जाना तय माना जा रहा था। संघ भी उनकी पैरोगारी में लगा था। मगर, केंद्रीय नेतृत्व ने न सिर्फ इन दोनों दावेदारों को किनारे कर दिया बल्कि ब्रज की भी उपेक्षा कर दी। चर्चा तो हेमा मालिनी को भी मंत्री बनाए जाने की थी लेकिन मोदी-शाह के चुनावी गणित में वह भी फिट नहीं बैठ पाईं। हालांकि ताल तो चौधरी बाबूलाल भी ठोंक रहे थे।
पार्टी के एक गुट में खुशी की लहर
कठेरिया की केंद्रीय राज्यमंत्री पद से छुट्टी पर पार्टी के एक धड़े में खुशी की लहर है। ये अलग बात है कि पार्टी अनुशासन की वजह से वे खुलकर सामने नहीं आ रहे। मगर, मंगलवार को जैसे ही मंत्रिमंडल में कठेरिया के शामिल न होने की स्थिति स्पष्ट हुई, विरोधी खेमे के लोगों ने एक-दूसरे को फोन कर बधाई देना शुरू कर दिया। बता दें कि कठेरिया के खिलाफ पार्टी के कई नेताओं ने मोर्चा खोल रखा है। समय-समय पर वे उन पर चोट भी करते रहे हैं।
योजनाओं पर पड़ेगा असर
शहर से केंद्रीय राज्यमंत्री पद छिनने का असर यहां संचालित होने वाली तमाम योजनाओं पर पड़ सकता है। भले ही इस पद पर रहते हुए डा. रामशंकर कठेरिया अब तक कोई सार्थक परिणाम न दे पाएं हों लेकिन इस पद पर बने रहने से शहरवासियों को उनसे उम्मीदें तो थीं। लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए, वह जो पैरोकारी कर सकते थे वैसी पैरोकारी अब नहीं हो पाएगी। हालांकि केंद्र में सत्ताधारी दल का सांसद होने के नाते वह प्रयास तो करेंगे लेकिन शायद वह धार न रहे। सबसे ज्यादा असर एनएच-2 के सिक्स लेन प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है। शहर में केंद्रीय मंत्री रहने की वजह से उन पर कार्य जल्द करने का दबाव बना रहता था। इसी प्रकार से पर्यटन, उद्योग तथा अन्य क्षेत्रों की योजनाओं को भी झटका लग सकता है।