संवाद न्यूज एजेंसी
कासगंज। एक माह से बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे ग्रामीणों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। बाढ़ का पानी नहीं उतर पा रहा और ऊपर से तेज बारिश ने मुसीबतों को और बढ़ा दिया है। तमाम ग्रामीण घरों की छतों पर या सूखे स्थानों पर डेरा डालकर काम चला रहे थे, लेकिन बारिश ने छत का सहारा भी छीन लिया है। खाना पकाने के लिए ईंधन की किल्लत का भी ग्रामीण सामना कर रहे हैं।
गंगा के जलस्तर में शनिवार को आठ सेंटीमीटर की वृद्धि हुई थी। इसका प्रभाव पटियाली इलाके बाढ़ प्रभावित गांव तक पहुंच गया। रविवार को प्रभावित इलाकों में पानी और बढ़ गया, लेकिन रविवार को बैराजों का प्रवाह कम होने से कछला ब्रिज पर 3 सेंटीमीटर पानी कम हुुआ है, लेकिन यह कमी मामूली है। इससे फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही। गंगा की बाढ़ से पटियाली गांव मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला तरसी, नगला खंदारी, नेथरा, इंद्राजसनपुर, मेहोला, नवाबगंज नगरिया, टिकुरी गठौरा, कुसौल, जिझोल, पनसोती, अलीपुर भकुरी, रिकहरा, गठैरा, नरदौली पुख्ता सहित आस पास के ग्रामीण के प्रभावित हैं। वहीं सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, शहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे सहित आस पास के तमाम गांव में पानी भरा हुआ है। नगला जयकिशन से प्रधान जगवीर सिंह ने बताया कि गांव की सड़क पर घुटने से ऊपर तक पानी भरा हुआ है। सबसेे ज्यादा मुसीबत बारिश से हुई है। लोगों का ईंधन भी भीग गया है। रविवार को पानी और बढ़ा है। समाजसेवी अब्दुल हफीज गांधी बताते हैं कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में काफी दिक्कतें हैं। जब तक बाढ़ का पानी नहीं निकलेगा तब तक जिंदगी ढर्रे पर नहीं लौट पाएगी। इन प्रभावित इलाकों में बारिश भी मुसीबत बनी हुई है। नगला जयकिशन के उर्वेश ने बताया कि चारों और बाढ़ का पानी भरा है। बस परेशानियां हीं परेशानियां हैं।