करवाचौथ का त्योहार शुक्रवार को अगाध आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनें निर्जल व्रत रखेंगी। शाम को सामूहिक रूप से चौथ माता की कथा सुनेंगी।
रात को चंद्रमा देख पति के हाथों जल पीकर व्रत खोलेंगी। घर-घर में करवाचौथ की तैयारियां चल रही हैं। गुरुवार को भी बाजार में सुहागिनाें की रौनक रही। उन्होंने मिट्टी, चीनी के करवे, सुहाग की चीजें खरीदीं।
पहली करवाचौथ रखने वाली नवविवाहिताओं में असीम उत्साह है। उनके मायके से सुहाग की चीजें व कपड़े आए हैं। पंजाबी समाज में नवविवाहित जोड़ी के यहां करवाचौथ का उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाता है।
शुक्रवार को सुबह चार बजे सास-बहू को सरगी खिलाएगी। उसके बाद व्रत आरंभ होगा।
सुबह से तैयारियों में व्यस्त सुहागिनें शाम को स्नान कर नई साड़ी, सोलह शृंगार में सज धज कर करवाचौथ की पूजा करेंगी। वीरावती की कथा सुनने के बाद आपस में करवे बदलेंगी।
सभी चौथ माता से अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी। फिर होगा चांद का इंतजार। दुल्हन बनी सजनी को चांद से खूब मनुहार करनी पड़ेगी। तब जाकर चंद्र देव के दर्शन होंगे। चलनी से चांद फिर सुहाग का दीदार करेंगी। उसके बाद पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोलेंगी।
पति भी रहेंगे व्रत
पत्नी के त्याग और समर्पण को देखते हुए पति भी उनके साथ करवाचौथ का व्रत रखेंगे। अपनी अर्द्धांगिनी के लिए गिफ्ट भी खरीदा जा चुका है। पतियों ने सुहाग की निशानी को ही प्राथमिकता दी है। ज्वेलर्स की मानें तो करवाचौथ के गिफ्ट में सबसे ज्यादा मंगलसूत्र की डिमांड है।
चंद्रोदय
मौसम विभाग के अनुसार 8:21 बजे
संस्कृत मनीषी चंदन लाल पाराशर के अनुसार 8:40 बजे