फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूक्रेन का भयानक मंजर जिंदगी भर रहेगा याद

विज्ञापन
07एमएनपी-45-बेवर में अपने परिजनों के साथ कार्तिक गुप्ता - फोटो : MAINPURI
विज्ञापन
बेवर। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार यूक्रेन में फंसा कार्तिक गुप्ता अपने घर पहुंच गया। कार्तिक ने बताया कि यूक्रेन में जो उसने भयानक मंजर देखा वह जीवन भर याद रहेगा। कार्तिक के घर पहुंचने पर परिवार में खुशी की लहर है।
विज्ञापन

कार्तिक गुप्ता ने बताया कि खारकीव पर रूस ने जब बमबारी की तो उसने तीन दिन अपने मेडिकल कॉलेज के बंकर में बिताए। बंकर से मात्र 20-30 मीटर की दूरी पर ही भयानक बमबारी की आवाज सुनकर छात्र डरे और सहमे बने रहते थे। साथ ही वहां का तापमान भी तीन से चार डिग्री ही था। हमारे और हमारे सहयोगियों के पास खाने को नाममात्र का कुछ सामान था। पीने का पानी भी कुछ ही मात्रा में था। इतना ही नहीं, लगातार बमबारी की आवाज सुनाई दे रहीं थी। खतरा बढ़ता जा रहा था, इसलिए हम लोगों ने हिम्मत की और पैदल ही यूक्रेन-रोमानिया सीमा के लिए रवाना हो गए। कॉलेज वाले कोई भी टैक्सी का सहयोग नहीं दे पाए। कार्तिक बताया कि एक मार्च को वह अपने साथियों के साथ 15 किलोमीटर पैदल चल कर 12 बजे वहां के स्टेशन पर पहुंचा। वहां यूक्रेन की पुलिस ने 100 डॉलर लेने पर ही ट्रेन के अंदर जाने दिया। ट्रेन दो मार्च की शाम नौ बजे खवीब् स्टेशन पर पहुंची वहां पर भी यूक्रेन की पुलिस ने बर्ताव अच्छा नहीं किया। पहले उन्होंने यूक्रेन वालों को बाहर निकाला उसके बाद हम लोगों को बाहर निकाला। बाहर निकलते ही 20 किमी दूर रोमानिया बॉर्डर के लिए ये 11 लोग टेक्सी से पहुंचे। वहां पर रोमानिया की पुलिस ने तत्काल खाने का पैकेट एवं पानी की बोतल दी तथा शरणार्थी कैंप में भेजा। जहां रहने खाने व सोने कि उचित व्यवस्था थी। भारतीय राजदूत का वहां सहयोग मिला। रात्रि में वे लोग शिविर में रुके रहे। तीन मार्च की शाम सात बजे की ट्रेन मे बैठकर चार मार्च को 10 बजे बुखारेस्ट एयरपोर्ट पहुच गए। वहां पर इंडियन एम्बेसी के लागों ने शेल्टर होम मे शिफ्ट कर दिया। छह मार्च को वह दिल्ली पहुंचा। चाचा के घर रुकने के बाद सोमवार को वह बेवर पहुंचा। कार्तिक के घर पहुंचने से परिवार में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें