कारगिल युद्ध में फिरोजाबाद जिले के दो बहादुर सैनिकों ने देश की खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। जब शहीदों के पार्थिव उनके घर आए तो सरकार से लेकर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों ने वादों की झड़ी लगा दी थी। मगर आज भी कई वादे पूरे नहीं हो सके हैं।
एका क्षेत्र के गांव नगला खेड़ा निवासी हेम सिंह कारगिल की लड़ाई में टाइगर हिल पर दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। जब शव आया था तो प्रशासन ने हेम सिंह द्वार बनवाने की बात कही लेकिन आज तक वो सिर्फ वादा ही रहे गया।
हेम सिंह दो मार्च 1988 को फौज में भर्ती हुए थे। रानी खेत में प्रशिक्षण लेने के बाद 1988 में श्रीलंका में बार्डर पर तैनाती मिली। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान लाइनपैरा कमांडो के रूप में तैनात किया गया। युद्ध के दौरन वो शहीद हो गए थे।
भाई सुघर सिंह ने बताया कि वो खुद भी कारगिल की लड़ाई में गिलेशियर पर तैनात रहे थे। उन्होंने कहा कि कारगिल शहीदों परिवारों को प्रशासन भूल चुका है। एका, वसुंधरा रोड का शहीद के नाम पर नहीं रखा है।