कड़कनाथ मुर्गा और मुर्गियों का पालन करना बेहद फायदा का सौदा बनता जा रहा है। एक मादा कड़कनाथ की बात करें तो ये वर्ष में करीब 60 अंडे देती है, लेकिन इसके एक अंडे की कीमत सामान्य अंडे से चार गुना अधिक होती है।
मुर्गी पालक किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें जिले में ही कड़कनाथ प्रजाति की मुर्गी के चूजे आसानी से उपलब्ध होंगे दो दिसंबर 2024 से कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में कड़कनाथ प्रजाति की मुर्गी का पालन हो रहा है। बुधवार को वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति की मुर्गी की विशेषताओं की जानकारी दी।
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पशुपालन विशेषज्ञ धर्वेंद्र सिंह ने बताया कि कड़कनाथ की तीन प्रजातियां ( जेट ब्लैक, पेंसिल्ड और गोल्डन) होती हैं। केंद्र पर जेट ब्लैक प्रजाति की कड़कनाथ मुर्गी का पालन किया जा रहा है। इस समय जेट ब्लैक प्रजाति के 30 लेयर और 120 चूजे हैं। इससे पहले गोल्डन प्रजाति के कड़कनाथ भी केंद्र पर पाले गए हैं। दोनों प्रजाति की विशेषता लगभग समान ही होती है। इसका औसत वजन 1.80 से 2.0 किलोग्राम तक होता है। मादा कड़कनाथ प्रतिवर्ष 60 से 80 तक अंडे देती है। एक अंडे की कीमत 20-30 रुपये है। इस प्रजाति की मुर्गी-मुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। किचन के अवशेष, हरा चारा व सामान्य दाना पानी देकर भी इसे पाला जा सकता है।
कड़कनाथ मुर्गी के अंडे मध्यम आकार के हल्के भूरे गुलाबी रंग के होते हैं। यह प्रजाति अपने काले मांस जो उच्च गुणवत्ता, स्वादिष्ट एवं औषधीय गुणवत्ता के कारण जानी जाती है। लेकिन धीरे-धीरे इसकी संख्या में कमी एवं आनुवंशिक विक्रति के कारण इसका अस्तित्व खतरे में है। सामान्य तौर पर यह किसानों को उपलब्ध नहीं हो रही है। इसी को देखते हुए केंद्र पर अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान के सानिध्य में टीम ने कड़कनाथ प्रजाति की मुर्गी का पालन शुरू किया है।
कड़कनाथ को काली मांसी के नाम से भी जानते हैं
कृषि प्रसार विशेषज्ञ शिवम प्रताप ने बताया कि कड़कनाथ मुर्गी का मांस, चोंच, जुबान, टांगे, नाखून, चमड़ी, कलंगी आदि काली होती है। यह मिलैनिन पिगमेंट की अधिकता के कारण होता है। जो हृदय व मधुमेह रोगियों के लिए उत्तम आहार है। इसका मांस स्वादिष्ट व आसानी से पचने वाला व अधिक प्रोटीन और कम वसायुक्त होता है। इसे काली मांसी के नाम से भी जाना जाता है। इसी विशेषता के कारण बाजार में इसकी मांग भी अधिक रहती है।
फरवरी माह में प्राप्त कर सकते हैं चूजे
केंद्र के स्टॉक इंचार्ज संदीप अग्रवाल ने बताया कि केंद्र पर 100 अंडो के लिए एक हैचरी मशीन भी उपलब्ध है। कुछ समय बाद इनके अंडों से हेचरी द्वारा चूजों को निकाला जाएगा। एक चूजे की कीमत लगभग 100 रुपये है। आगामी फरवरी माह में चयनित गांवों में केंद्र की हैचरी यूनिट से घर के पिछबाडे मुर्गीपालन योजना के तहत जनपद के मुर्गी पालकों को पोल्ट्री चिक्स उपलब्ध कराएं जाएंगे। फरवरी माह में मुर्गी पालक कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी पर आकर चूजे प्राप्त कर सकते हैं।
ऐसे करें पालन
पशुपालन विशेषज्ञ ने बताया कि इसके 100 चूजों को पालने के लिए 150 वर्ग फीट जगह की जरूरत होती है। शेड में साफ-सफाई रखें और उसमें पानी और बिजली की व्यवस्था करें। आवास आरामदायक और हवादार बनाएं। एक शेड में दो अलग-अलग ब्रीड को नहीं रखना चाहिए।