ताजगंज प्रोजेक्ट के बेतरतीब काम से ताजमहल तक ऊबड़ खाबड़ हुआ रास्ता
तीनों प्रवेश द्वारों के पास गिरकर चोटिल हो रहे पर्यटक, सोशल मीडिया पर छाए फोटो
ट्रेवल साइट पर पर्यटक निकाल रहे ताजमहल के शहर में अव्यवस्थाओं पर गुस्सा
जरा हटके, जरा बचके... ये गीत कभी मुंबई के लिए गाया गया, लेकिन इन दिनों ताजमहल देखने आ रहे सैलानियों को उनके गाइड कुछ इसी तरह से गिरने, चोट लगने से बचा रहे हैं। 197 करोड़ रुपये के ताजगंज प्रोजेक्ट में ताजमहल के तीनों रास्तों में की गई खोदाई से हर दिन हादसे हो रहे हैं।
ताजगंज में खोदाई के बाद जहां जलभराव से आधा दर्जन मकान चटक गए, तो पूर्वी गेट पर दुकान ही ढह गई। ताज के इन रास्तों से गुजरने वाले सैलानी हर दिन गिरकर चोटिल भी हो रहे हैं। वहीं वे अपना गुस्सा ट्रेवल साइट और सोशल मीडिया पर ‘मन की बात’ लिखकर निकाल रहे हैं।
टोरंट की खोदाई ने बिगाड़े हालात
ताजगंज प्रोजेक्ट में ताजमहल फोरकोर्ट के फर्श से 8 इंच नीचे रोड बनाने की बाध्यता है। इस कारण पूर्वी और पश्चिमी गेट पर रोड 24 से 30 इंच तक खोदी गई है, लेकिन दक्षिणी गेट पर मुख्य मार्ग और चारों कटरों की रोड टोरंट ने एलटी लाइन के अंडरग्राउंड करने के कारण खोद रखी है। बारिश में जलभराव से खोदाई वाली जगहें धंस गई। इससे हर दिन सैलानी गिर रहे हैं। यही हाल ताजमहल पूर्वी गेट पर पाठक प्रेस के पास का है।
पूर्वी गेट पर और गिर सकती हैं दुकानें
आगरा। ताजगंज प्रोजेक्ट में पूर्वी गेट पर कोने की दुकान मंगलवार रात को ढह गई तो वहीं कई अन्य दुकानें गिरने के कगार पर हैं। दरअसल, बगीची में बनी इन दुकानों की नींव में ताजगंज प्रोजेक्ट में की गई खोदाई से हुए जलभराव का पानी पहुंच रहा है। सालों पुरानी दुकानें पहले ही जर्जर स्थिति में थीं। अब नींव में पानी भर जाने से इनके भी गिरने की आशंका मंडरा रही है। पूर्वी गेट के दुकानदार दो महीने से खोदाई के कारण व्यापार नहीं कर पा रहे। मिट्टी, सिल्ट और खोदाई के मलबे से पर्यटक दुकानों तक पहुंच रहे हैं।
‘ताजगंज प्रोजेक्ट में प्लानिंग का अभाव रहा है। विकास कार्य हर शहर में होते हैं, लेकिन उससे होने वाली परेशानी से निपटने के विकल्प पहले ही तैयार किए जाते हैं, लेकिन ताजमहल के लिए कोई योजना नहीं बनाई। स्थानीय लोग परेशान हैं। पर्यटक अपने साथ आगरा की खराब छवि लेकर जा रहे हैं’
अभिनव जैन
सोशल एक्टिविस्ट, ताजगंज
‘पर्यटक एक बार ही ताज देखने आते हैं, लेकिन बेतरतीब ढंग से हो रहे काम के बीच परेशान होकर आगरा से जा रहे हैं। माउथ पब्लिसिटी से ही शहरों की छवि बनती, बिगड़ती है’
राकेश चौहान
अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसो.