खेल फीस न लिए जाने के चलते वित्त विहीन स्कूलों को माध्यमिक खेलकूद में प्रतिभाग नहीं कराया जा रहा
एक नजर आंकड़ों पर
750 यूपी बोर्ड के विद्यालय जिले में संचालित हैं
28 राजकीय विद्यालय हैं
110 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं
612 वित्त विहीन विद्यालय
हितेश सिंह
यूपी बोर्ड के वित्त विहीन विद्यालयों के सैकड़ों विद्यार्थी चालू शैक्षणिक सत्र में अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। शासनादेश के अनुपालन में विभाग वित्त विहीन स्कूलों से खेल फीस नहीं ले रहा। वहीं बजट के अभाव में विभाग जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में वित्त विहीन स्कूलों के छात्र-छात्राओं को प्रतिभाग भी नहीं करा रहा है।
यूपी बोर्ड के सर्वाधिक विद्यार्थी वित्त विहीन स्कूलों में ही पढ़ते हैं। राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों की संख्या वित्त विहीन की अपेक्षा एक चौथाई से भी कम है। वित्त विहीन स्कूलों के विरोध के बाद गत सत्र में इनसे फीस न लिए जाने का आदेश जारी किया गया था। चालू सत्र में इनसे फीस नहीं ली जा रही है, न ही खेलों में प्रतिभाग कराया जा रहा है। मंगलवार को जिलास्तरीय सुब्रतो फुटबाल प्रतियोगिता में एक भी वित्त विहीन स्कूल की टीम नहीं थी।
‘शासनादेश में वित्त विहीन विद्यालयों से खेल फीस लिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए पिछले सत्र में खेल फीस का विरोध किया गया था। चालू सत्र में खेल प्रतियोगिताओं में प्रतिभागिता के लिए विभाग की ओर से कोई निर्देश नहीं प्राप्त हुए हैं। विभागीय खेलकूद में प्रतिभाग नहीं कराया गया तो स्कूल स्तर पर खेलकूद कराए जाएंगे।’
- रामवीर फौजदार, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश शिक्षा संस्थान प्रबंधक परिषद
‘गत शैक्षणिक सत्र में ही खेल फीस के संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक से मार्गदर्शन मांगा गया था। कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। बजट के अभाव में वित्त विहीन स्कूलों का प्रतिभाग करा पाना मुश्किल हो रहा है। निदेशक ने जेडी से खेल फीस के संबंध में प्रस्ताव मांगा है। कोई निर्देश मिलेगा, तो उस पर अमल किया जाएगा।’ - दिनेश कुमार यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक
दस रुपये प्रति विद्यार्थी है फीस
विद्यालयों को प्रत्येक विद्यार्थी के हिसाब से दस रुपये माध्यमिक शिक्षा विभाग को फीस के रूप में देना होता है। प्रत्येक विद्यार्थी को पांच रुपये प्रति माह के हिसाब से केवल दो माह की खेल फीस देनी होती है। वहीं रेडक्रास के लिए छह और स्काउट एंड गाइड के लिए चार रुपये देने होते हैं।