थाना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि परमजीत वेंटिलेटर पर हैं। उन्हें होश नहीं आ सका है। परिजनों ने बताया कि परमजीत कई साल से तनाव में थी। उनका मनोचिकित्सक से इलाज भी चल रहा था। तनाव में आकर ही उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की। होश में आने पर पुलिस उनका बयान दर्ज करेगी। कमरे पर फिलहाल ताला लगा दिया गया है।
बाल्टी रखकर लगाई थी फांसी
थाना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि परमजीत ने फांसी खिड़की से दुपट्टा बांधकर लगाई थी। इसके लिए पहले फर्श पर बाल्टी रखी थी। इसके बाद लटक गईं थीं। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य संकलन किया है। कमरे से मोबाइल व बाल्टी को कब्जे में लिया है। एक सुसाइड नोट भी मिला। फोरेंसिक टीम ने फर्श पर मुंह से निकली लार का भी सैंपल लिया है। कमरे से डॉक्टर के तीन पर्चे भी मिले हैं। यह मनचिकित्सक के हैं।
अंग्रेजी में लिखा सुसाइड नोट
पुलिस ने बताया कि छात्रा के कमरे में मिला सुसाइड नोट अंग्रेजी में लिखा गया है। इसमें उन्होंने तनाव में होने की बात लिखी है। इसके साथ ही अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
सहपाठी बोले, गुमसुम रहती थीं परमजीत
एसएन मेडिकल कॉलेज में एमडी की छात्रा परमजीत के आत्महत्या की कोशिश करने की जानकारी पर साथी परेशान हैं। सहपाठियों ने बताया कि परमजीत एक साल से परेशान थीं। वह तनाव में रहती थी। कई बार कक्षा में गुमसुम हो जाती थीं। सहपाठी उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। मई में परीक्षा होने वाली थीं।
तनाव को छिपाने से बढ़ जाती है बीमारी: डॉ. राठौर
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के प्रमुख अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर का कहना है कि कई बार उच्च बौद्धिक क्षमता के लोग अपने तनाव को छिपा लेते हैं। ऐसे में उनकी परेशानी को पहचान पाना संभव नहीं हो पाता। यह जब ज्यादा दिन तक छिपाए रखते हैं तो उनकी पीड़ा अधिक बढ़ जाती है। उनके सहन करने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे व्यक्ति दूसरों से अलग रहने लगते हैं। बात नहीं करते हैं। घर से बाहर नहीं जाते हैं। कई बार आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।