जोंस मिल की जांच ‘बीरबल की खिचड़ी’ बन गई है। तीन माह बाद भी जांच अधूरी है। एडीएम प्रशासन के एक बार फिर नए सिरे से जांच करने के आदेश पर सवाल खड़े हो रहे हैं। डीएम प्रभु एन सिंह के बार-बार निर्देशित करने के बावजूद अब तक जांच बेनतीजा है।
जोंस मिल में हुए विस्फोट के बाद 29 जुलाई को जिला मजिस्ट्रेट प्रभु एन सिंह ने जोंस मिल की जांच एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव को सौंपी थी। तीन माह बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी। अगस्त-सितंबर में जांच के दौरान यहां मौजा घटवासन के 23 खसरों में 128 बीघा संपत्ति मिली थी। इसमें बड़े पैमाने पर श्रम विभाग, नगर निगम, नजूल, सिंचाई विभाग की संपत्ति होने का खुलासा हुआ था।
नजूल की फर्जी एनओसी से बिल्डर ने नक्शे पास कराए थे। डीएम के आदेश पर इनकी एनओसी निरस्त की गई। कई दिनों तक यहां मौके पर काबिज लोगों के एडीएम प्रशासन कार्यालय में बयान दर्ज हुए। इधर पिछले दिनों जोंस मिल के मालिक सर जोंस की वारिस मौरीन उर्फ गीता चीमा के अधिवक्ता की हत्या हो चुकी है। फिर भी इस मामले में जांच की सुस्त रफ्तार पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।