जोंस मिल कांड में आरोपियों पर चौतरफा शिकंजा कसने की तैयारी है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने अब तक की जांच में 40 से अधिक लोगों को मुल्जिम बनाया है। जीवनी मंडी चौकी की भूमि पर कब्जे के लिए पुलिस भूमि का सीमांकन कराएगी। दूसरी तरफ भूमाफिया की संपत्तियां कुर्क होंगी।
ग्रीक व्यापारी मेजर एंटॉनी यू जॉन ने करीब 100 साल पहले सरकार से पट्टे पर जमीन लेकर जीवनी मंडी में धागा, कपड़ा व आटा मिलें खोली थीं। मेजर एयू जॉन की मौत के बाद जमीनों का फर्जी दस्तावेजों से खरीद-फरोख्त का खेल शुरू हुआ। आरोप है कि मेजर जॉन के साझीदार रहे मुन्नी लाल मेहरा, हीरालाल पाटनी और गंभीरमल पांड्या और उनके वारिशों ने अवैध ढंग से 22 खसरा नंबरों में 2596.57 करोड़ रुपये कीमत की 100 बीघा से अधिक पुलिस, नजूल, नहर व अन्य विभाग और पट्टे की भूमि बेच कर अकूत संपत्ति कमाई।
ईओडब्ल्यू के पुलिस उपाधीक्षक विवेक कुमार शर्मा ने बताया कि जांच में गंभीरमल पांड्या के बारिश नरेश कुमार जैन, सुरेश जैन, दिनेश कुमार जैन और हीरालाल पाटनी के वारिश विनय पाटनी, विजय पाटनी, प्यारीबाई पाटनी सहित 40 से अधिक लोगों को मुल्जिम बनाया है। उन्होंने कहा कि जांच अंतिम चरण में है। आरोपपत्र तैयार किए जा रहे हैं। जिन्हें शासन को भेजा जाएगा। फिर आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू होगी।
कुर्क होंगी भूमाफिया की संपत्तियां
जोंस मिल कांड में एक तरफ मेजर एयू जॉन के साझीदारों पर शिकंजा कसेगा। दूसरी तरफ घोषित भूमाफिया राजेंद्र प्रसाद जैन उर्फ रज्जो, कंवलजीत सिंह उर्फ कंवलदीप सिंह और हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन की संपत्तियां जब्त करेगी। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि रज्जो जैन की संपत्ति पहले ही कुर्क हो चुकी हैं। बाकी भूमाफिया की संपत्तियां कुर्की के लिए चिह्नित कराई जाएंगी।
पुलिस लेगी चौकी की भूमि पर कब्जा
राजस्व अभिलेख में जीवनी मंडी पुलिस की चौकी की 1800 वर्ग मीटर से अधिक भूमि है। जो पुलिस महकमा के नाम दर्ज है। इस भूमि पर अमित गोयल ने अवैध कब्जा कर निर्माण कराए हैं। ईओडब्ल्यू ने पुलिस कमिश्नर जे रविन्दर गौड को पुलिस विभाग की भूमि पर कब्जा लेने के लिए पत्र लिखा था। डीसीपी सिटी ने बताया कि कब्जा लेने के लिए भूमि का सीमांकन कराया जाएगा। इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।
नेताओं का संरक्षण, नहीं हो सकी कार्रवाई
जोंस मिल में 107 करोड़ रुपये की सरकारी भूमि पर कब्जा है। जिसे तत्काल खाली कराना था, लेकिन सत्तादल से जुड़े नेताओं के संरक्षण के कारण न तो भूमाफिया पर प्रभावी कार्रवाई हो सकी। न सरकारी जमीन कब्जा मुक्त हो पाई। एक भूमाफिया कैबिनेट मंत्री का रिश्तेदार बताया जाता है। जबकि दूसरे भूमाफिया की बिल्डिंग में एक विधायक का कार्यालय संचालित है।