फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेईई में आगरा के होनहारों ने छुआ आसमां

Mon, 13 Jun 2016 02:05 AM IST
अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
जेईई में आगरा के होनहारों ने छुआ आसमां - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
हर्ष जैन 294 और आयुष गोयल की 406 रैंक
विज्ञापन

ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) एडवांस में आगरा के होनहारों ने सफलता का आसमां छुआ। हर्ष जैन के 294 और आयुष गोयल ने 406 रैंक हासिल की। अरिहंत जैन 1208, शिवम गर्ग 2662, शोएब शकील 1550 और अमन कुमार 3927 रैंक हासिल करने में सफल रहे। इसके अलावा सुमित दिवाकर ने एससी श्रेणी में 97 रैंक हासिल की। 
 रविवार को रिजल्ट आउट होते ही परीक्षार्थी वेबसाइट पर अपना परिणाम देखने में जुट गए। सर्वर डाउन रिजल्ट देखने में रोड़ा बना रहा। दिन भर यही हाल रहा। शाम को सर्वर ने राहत दी और परीक्षार्थी रिजल्ट देख सके। विशेषज्ञ डा. ललितेश यादव ने बताया कि 22 मई को परीक्षा संपन्न हुई थी, इसमें आगरा से 1200 परीक्षार्थी शामिल हुए। 
विज्ञापन


लक्ष्य-30 फिर बनी गरीब छात्रों की उम्मीद
आर्थिक तंगी प्रतिभा के आड़े न आए, निमित्त मात्र सोसाइटी के लक्ष्य-30 ऐसे छात्रों की उम्मीद बना हुआ है। कोचिंग के हर्ष जैन, अरिहंत, शिवम, प्रभात जैन, भरत दुबे, तरुण गोयल, शिवराम ने सफलता प्राप्त की। संरक्षक डा. मनोज रावत, एकेडमिक हेड प्रो. एससी अग्रवाल और डा. अमरीश अग्रवाल ने मेधावियों को बधाई दी। 
  
लक्ष्य प्राप्ति तक मत मानो हार: हर्ष 
हर्ष कहते हैं कि लक्ष्य प्राप्ति तक हार मत मानो। इसे पाने के लिए हर जतन करो। ट्रांस यमुना कालोनी निवासी हर्ष ने बताया कि पिता की कपड़े की छोटी सी दुकान है, आर्थिक तंगी रही, फिर भी हिम्मत नहीं हारी। 10-12 घंटे तक पढ़ाई की और मुकाम पाया। बेटे की सफलता पर मां अनीता जैन और पिता संजय जैन गदगद हैं। हर्ष कंप्यूटर साइंस में करियर बनाना चाहते हैं। 

घंटे नहीं मन लगाकर पढ़ना जरूरी: आयुष
आयुष का मानना है कि घंटे नहीं मन लगाकर पढ़ना जरूरी है। 8-10 घंटे तक पढ़ाई करने वाले आयुष ने बताया कि पिता अनूप इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन पैतृक व्यापार करना पड़ा। उन्होंने इंजीनियर बन पिता का सपना पूरा किया है। फुरसत में संगीत सुनने के शौकीन आयुष कंप्यूटर साइंस ब्रांच में जाना चाहते हैं।
विज्ञापन


पिता के संघर्ष से मिली इनको प्रेरणा 
पिता बैग सिलते थे, उनकी आस सिर्फ मेरी सफलता पर टिकी थी। कोचिंग में निशुल्क तैयारी जरूर होती, फिर भी खर्च की जरूरत होती। पिता के संघर्ष से कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा मिली। इतना कहते ही अरिहंत की आंखें नम हो गई। मोहनपुरा निवासी अरिहंत की कंप्यूटर साइंस ब्रांच पहली पसंद है। नार्थ ईदगाह कालोनी शिवम गर्ग बताते हैं कि पिता दीपक गर्ग, मेडिकल स्टोर पर नौकरी करते हैं। तंगी थी, लेकिन पिता उसे इंजीनियर बनाना चाहते थे। शिवम सिविल इंजीनियर बनना चाहते हैं।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें